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मुजफ्फरपुर : कुहासा नहीं होने के कारण गेहूं बुआई करने वाले किसान चिंतित

28 Dec, 2018 4:17 am
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मुजफ्फरपुर : कुहासा नहीं होने के कारण गेहूं बुआई करने वाले किसान चिंतित

मुजफ्फरपुर : ठंड में कमी व कुहासा नहीं होने से किसान गेहूं की फसल को लेकर चिंतित हैं. किसानों को गेहूं की फसल प्रभावित होने की आशंका सता रही है. दूसरी ओर, कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि कुहासा का गेहूं के उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ता है. लेकिन, तापमान दस डिग्री से नीचे […]

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मुजफ्फरपुर : ठंड में कमी व कुहासा नहीं होने से किसान गेहूं की फसल को लेकर चिंतित हैं. किसानों को गेहूं की फसल प्रभावित होने की आशंका सता रही है. दूसरी ओर, कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि कुहासा का गेहूं के उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ता है. लेकिन, तापमान दस डिग्री से नीचे होना चाहिए. हाल के दिनों में तापमान में 10 डिग्री से कम रह रहा है. यह गेहूं के उत्पादन के लिए काफी बढ़िया है.
कुढ़नी निवासी किसान संतोष कुमार ने कहा कि कुहासा नहीं होने से इस बार गेहूं की फसल प्रभावित हो सकती है. कुहासा होने से ही गेहूं की बढ़िया पैदावार होती है. बुआई के 30 से 40 दिनों के अंदर गेहूं में कल्ली निकलती है. कुहासा नहीं होगा, तो गेहूं में कम कल्ली निकलेगी.
उपज पर पड़ेगा असर
सकरा निवासी किसान दिनेश कुमार का कहना है कि कुहासा नहीं होने से बीज का अंकुरण सही होता है, लेकिन पौधे में कल्ली कम निकलेगी. गेहूं के पौधे का तना ठंड में ही मोटा बनता है. अधिक गर्मी पड़ने पर पौधे की मोटाई कम हो जाती है.
कुहासा नहीं होने से गेहूं के फसल पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. न्यूनतम तापमान 10 डिग्री के आसपास रहना चाहिए. तापमान अधिक रहने से गेहूं की फसल प्रभावित होती है. वर्तमान में जो तापमान है, यह गेहूं के लिए बढ़िया है.
डॉ सतीश कुमार सिंह (गेहूं प्रजनक, डाॅ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा )
कुहासा नहीं होने से गेहूं की फसल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है. 10 डिग्री से नीचे तापमान रहना गेहूं के फसल के लिए बढ़िया है. 10 से नवंबर के अंत तक का समय गेहूं की बुआई के लिए बढ़िया होता है. उसकी पैदावार अच्छी होती है. लेकिन, विलंब होने पर गेहूं की बुआई करने वाले किसान को मात्रा बढ़ा देनी चाहिए.
नवंबर के अंत तक बुआई करने के लिए दो किलो बीज प्रति कट्ठा की आवश्यकता है. लेकिन, दिसंबर में किसान को प्रति कट्ठा तीन किलो बीज की बुआई करनी चाहिए.
अनुपमा कुमारी (कृषि वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र, सरैया)
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