डीएसपी बने सिपाही, तो प्रियंका ने खोल दी अजय की पोल

Updated at : 06 Nov 2018 6:56 AM (IST)
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डीएसपी बने सिपाही, तो प्रियंका ने खोल दी अजय की पोल

मुजफ्फरपुर : पुलिस के हत्थे चढ़े अजय पांडेय व उसकी पत्नी प्रियंका इतने शातिर थे कि पुलिस को सच उगलवाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. हालांकि दोनों से पहले अजय के साला मनीष ने सारी सच्चाई पुलिस के सामने कबूल कर ली थी. छापा के समय अजय पुलिस को ही छापेमारी का नियम कानून […]

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मुजफ्फरपुर : पुलिस के हत्थे चढ़े अजय पांडेय व उसकी पत्नी प्रियंका इतने शातिर थे कि पुलिस को सच उगलवाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. हालांकि दोनों से पहले अजय के साला मनीष ने सारी सच्चाई पुलिस के सामने कबूल कर ली थी. छापा के समय अजय पुलिस को ही छापेमारी का नियम कानून बताने लगा था. जब उसे बताया गया कि उसे जयप्रकाश हत्याकांड में पकड़ा गया तो उसने चुप्पी साध ली थी.
पुलिस टीम ने भी तीनों को अलग अलग कमरे में रख कर पूछताछ की. लेकिन अजय व प्रियंका मुंह खोलने को तैयार नहीं थे. इसी बीच डीएसपी पश्चिमी कृष्ण मुरारी प्रसाद सिपाही बन कर प्रियंका के पास पहुंचे. उसे कहा कि मनीष व अजय ने सारी बातें बता दी है. तुम भी बोल दो, बच जाओगी. उसे सिपाही की नौकरी का लालच भी दिया गया. अजय से परेशान प्रियंका ने सारी कहानी पुलिस के सामने उगल दी.
उसके बाद अजय भी टूट गया. मोबाइल का कॉल डिटेल देख उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया.
एस्सेल के जाते ही आर्थिक संकट में घिरा
अजय पांडेय अपनी पहली पत्नी के साथ सदर थाना के भगवानपुर में किराये का मकान लेकर रहता था. वहां उसकी पत्नी वंदना से प्रियंका मिलने आती थी. अजय को वह जीजा कहती थी. कुछ दिनों बाद अजय ने उससे पटना के अन्नपूर्णा मंदिर में शादी कर ली. इसके बाद वह एस्सेल के शहर में विद्युत व्यवस्था संभालने के बाद उपभोक्ता मंच बना कर वहां दबाव की राजनीति करने लगा. ब्लैकमेल करने से तंग आकर एस्सेल ने उसे दरकिनार कर दिया. दो-दो परिवार का खर्च चलाने के लिए उसने जेपी के अपहरण की योजना बना ली.
राजू व अजहर समेत अन्य की तलाश
राजू, करजा के अजहर शेख,भगवानपुर के ही दिवाकर उर्फ राहुल के साथ उसने अपहरण की योजना बनायी थी. पुलिस अब इन सभी की तलाश है. 2010 में अजय पांडेय ने अपने मुहल्ला रामबाग चौड़ी के मुकेश महतो, खगड़िया के रहीमपुर निवासी राजू सहित अन्य साथियों के साथ पटना में एक व्यवसायी का अपहरण कर फिरौती में 65 लाख रुपये वसूला था. राजू के पिता राज्य ट्रांसपोर्ट में नौकरी करते थे. उनकी मृत्यु के बाद सरकारी लाभ के लिए शहर में भटक रहे राजू से अजय की दोस्ती हुई थी.
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