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बिहार : जांच केंद्रों में खुलेआम चल रहा लूट का खेल, विभाग सुस्त

आनंद तिवारी पटना : राजधानी में संचालित पैथोलॉजी सहित अन्य लैब और जांच केंद्रों में खुलेआम लूट का खेल चलता है. डॉक्टर जिस सेंटर या लैब पर जांच की सलाह देते हैं, उसके अलावा दूसरी जगह की रिपोर्ट स्वीकार नहीं करते. इसकी वजह डॉक्टर, लैब और जांच केंद्रों के बीच कमीशनबाजी है. सूत्रों के अनुसार […]

आनंद तिवारी
पटना : राजधानी में संचालित पैथोलॉजी सहित अन्य लैब और जांच केंद्रों में खुलेआम लूट का खेल चलता है. डॉक्टर जिस सेंटर या लैब पर जांच की सलाह देते हैं, उसके अलावा दूसरी जगह की रिपोर्ट स्वीकार नहीं करते. इसकी वजह डॉक्टर, लैब और जांच केंद्रों के बीच कमीशनबाजी है. सूत्रों के अनुसार जांच केंद्र शहर भर के डॉक्टरों को करोड़ों रुपये सालाना कमीशन पहुंचाते हैं. इस लेनदेन का खेल विभाग के अधिकारियों को पता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साधे हुए हैं.
– डॉक्टरों के कमीशन पर रोक : इंडियन रेडियोलॉजिकल एंड इमेजिंग एसोसिएशन ने रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी जांच के बदले डॉक्टर को दिये जाने वाले कमीशन या इंसेटिव पर रोक लगा रखी है. इसके बावजूद कुछ जांच सेंटर कमीशन दे रहे हैं. यही नहीं दवाओं में भी कमीशन का खेल चल रहा है. इसका खामियाजा सीधे मरीजों को भुगतना पड़ रहा है.
दूसरे लैब की जांच को नहीं मानते हैं डॉक्टर
मरीज जैसे ही डॉक्टर के पास जाता है. वह कई जांच लिखता है. इसके साथ अधिकतर डॉक्टर लैब भी बताते हैं. यदि दूसरे लैब से जांच करायी, तो डॉक्टर उसे नहीं मानते हैं. फिर मरीज कभी दूसरे डॉक्टर के पास जाता है, तो नये सिरे से सभी जांच करायी जाती हैं. इसके पीछे पूरा कमीशन का खेल होता है. कई बार मरीजों ने दूसरे लैब की जांच नहीं मानने को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक शिकायत भी की लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है.
किसमें कितना मिलता है कमीशन
जांच सामान्य दर कमीशन (30%)
सोनोग्राफी 500 से 1500 तक 150-500 तक
सीटी स्कैन 1600 से 2500 तक 500-800
एमआरआई 3000 से 1000 तक 900-3000
पैथोलॉजी जांच 50 से 1000 तक 15-300
नोट : जांच सेंटर वाले 15 रुपये से लेकर तीन हजार रुपये तक डॉक्टरों को कमीशन देते हैं.
– बेंगलुरु में छापेमारी में हुआ था कमीशन का खुलासा: आयकर विभाग की टीम द्वारा पिछले महीने बेंगलुरु के जांच सेंटरों पर छापेमारी के दौरान 200 करोड़ रुपये कमीशन के लेनदेन का मामला सामने आया था. अगर यहां के सेंटरों पर भी छापेमारी हो तो ऐसा ही मामला जरूर सामने आ सकता है.
इनका कहना है…
राजधानी में 80 प्रतिशत तक जांच सेंटरों पर कमीशनखोरी चल रही है. ये अपना बिजनेस व धंधा बढ़ाने के लिए डॉक्टरों को कमीशन देते हैं. इसे रोकने के लिए शासन-प्रशासन स्तर से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. इससे मरीजों को काफी फायदा होगा.
डॉ रत्नेश चौधरी, आईजीआईएमएस
– क्या कहता है बिहार एथिक्स काउंसिल : कमीशन लेना व देना मेडिकल काउंसिल एथिक्स के नियमों की अवहेलना है. ऐसे में एथिक्स टीम से भी जांच करा लेनी चाहिए. आईएमए ने भी अपनी आचार संहिता में कमीशनखोरी को प्रतिबंधित किया है.
डॉ सुनील सिंह, मेंबर, एथिक्स बिहार मेडिकल काउंसिल
Prabhat Khabar Digital Desk
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