तुलसीदास के काव्य में दिखी लोकचेतना, समरसता और मानवीय मूल्यों की झलक

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मंचासीन अतिथि | Prabhat Khabar Network

मुंगेर विश्वविद्यालय में तुलसीदास जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन, विशेषज्ञों ने तुलसी के साहित्य में मानवीय मूल्यों और सामाजिक समरसता पर चर्चा की।

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मुंगेर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग की ओर से जेआरएस कॉलेज, जमालपुर के प्रशाल में ‘तुलसीदास का युगबोध और उनकी लोकवादी चेतना’ विषय पर तुलसीदास जयंती समारोह सह संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. हरिश्चंद्र शाही ने की. समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ.

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मानवीय मूल्यों और समरसता का संदेश

विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डॉ. शिव कुमार मंडल ने कहा कि तुलसीदास का काव्य मध्यकालीन संकटों के बीच मानवीय मूल्यों और सामाजिक समरसता का संदेश देता है. उन्होंने कहा कि तुलसी का साहित्य आज भी समाज को मानवीय मूल्यों और सकारात्मक सोच की दिशा देता है.

मानविकी संकायाध्यक्ष सह अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. भवेशचंद्र पांडेय ने तुलसी के साहित्य में समन्वयकारी दृष्टि और सकारात्मक चेतना को रेखांकित किया. अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक डॉ. प्रिय रंजन तिवारी ने तुलसी के युगबोध को वैश्विक एवं मानवीय संवेदना के धरातल पर व्याख्यायित किया.

इतिहास और संस्कृति के नजरिये से तुलसी

इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. गिरीश चंद्र पांडेय ने तुलसी के काव्य का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण करते हुए इसे ‘आनंद की साधनावस्था’ के रूप में बताया. उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. शाहिद रजा जमाल ने तुलसी के साहित्य में निहित गंगा-जमुनी तहजीब और सांस्कृतिक समन्वय पर प्रकाश डाला.

जेआरएस कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. देवराज सुमन ने तुलसी की कर्म-प्रधानता और सामाजिक नीति पर अपने विचार रखे.

लोकनायकत्व में सभी वर्गों के सम्मान की भावना

हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. ब्रजेंद्र कुमार ब्रजेश एवं डॉ. अभय कुमार ने तुलसीदास की लोकमुखी दृष्टि और उपेक्षित वर्गों के प्रति उनकी चेतना के विभिन्न पक्षों को सामने रखा.

अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. हरिश्चंद्र शाही ने कहा कि तुलसी का लोकनायकत्व समाज के सभी वर्गों को आदर और आत्मसम्मान देने की भावना में निहित है.

शोधार्थी ने कराया प्रभावी संचालन

मंच संचालन शोधार्थी अतुल राज ने किया. उन्होंने तुलसीदास की युगीन प्रासंगिकता और समन्वयवादी चौपाइयों के माध्यम से संगोष्ठी को गतिशील बनाया. कार्यक्रम के अंत में प्राध्यापक प्रमोद यादव ने धन्यवाद ज्ञापन किया.


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Birendra Kumar Sing

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By Birendra Kumar Sing

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