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प्रकृति पर्व सोहराय पर आदिवासी महिलाएं थिरकी, मांदर व झाल से गूंज उठा वन क्षेत्र

Updated at : 13 Jan 2026 7:55 PM (IST)
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प्रकृति पर्व सोहराय पर आदिवासी महिलाएं थिरकी, मांदर व झाल से गूंज उठा वन क्षेत्र

जीवन के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का प्रतीक है.

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मुरादे पंचायत के नाढी गांव में आदिवासियों ने पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ सोहराय पर्व मनाया हवेली खड़गपुर पहाड़ी एवं वन क्षेत्र अंतर्गत आदिवासी गांवों में प्रकृति पर्व सोहराय पूरे हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया जा रहा है. मंगलवार को मुरादे पंचायत के नाढी गांव में आदिवासी समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ सोहराय पर्व मनाकर प्रकृति पूजा की सार्थकता को साकार किया. पर्व के दौरान मांदर और झाल की थाप पर महिलाएं, पुरुष और युवा थिरकते नजर आए. सोहराय पर्व के महत्व पर चर्चा करते हुए राकेश चंद्र सिन्हा ने कहा कि यह पर्व प्रकृति, पशुधन और जीवन के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र के लोगों का प्रकृति पर्व सोहराय में शामिल होना काफी सुखद अनुभूति हो रहा है. डा. अशोक केशरी और अमित कुमार ने सोहराय पर्व को सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने वाला और प्रकृति पूजा का विशिष्ट पर्व बताया. इस अवसर पर नगर के प्रबुद्धजनों की मौजूदगी ने पर्व को और भी यादगार बना दिया. बड़ी दुर्गा मंदिर समिति खड़गपुर की ओर से ग्रामीणों के बीच सम्मान भाव के साथ उपहार सामग्री भी बांटा गया. वहीं बच्चों के बीच बिस्किट और चॉकलेट बांटे गए. मौके पर संतोष केशरी, पुरुषोत्तम पंडित, बाबूलाल मरांडी, अंकिता कुमारी, सुजाता देवी, बमबम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं प्रबुद्धजन मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANAND KUMAR

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