मुंगेर की झेलम गर्ग के पेंटिंग ने राष्ट्रीय मंच पर मचाई धूम

‘लोककथा से चित्रकथा तक कथा के रंग’ कार्यक्रम में योग नगरी मुंगेर के बासुदेवपुर निवासी राजीव झा की पत्नी झेलम गर्ग ने अपनी कला से राष्ट्रीय स्तर पर अपना दम दिखाया
मुंगेर. पटना स्थित ललित कला अकादमी में अभिप्सा व अनम की ओर से तीन से पांच अप्रैल तक आयोजित ‘लोककथा से चित्रकथा तक कथा के रंग’ कार्यक्रम में योग नगरी मुंगेर के बासुदेवपुर निवासी राजीव झा की पत्नी झेलम गर्ग ने अपनी कला से राष्ट्रीय स्तर पर अपना दम दिखाया. साथ ही अपने कला और मुंगेर की अलग पहचान बनायी. देश के विभिन्न राज्यों से आए 52 प्रतिभागियों के बीच उनकी पेंटिंग को अतिथियों ने खूब सराहा. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री श्याम शर्मा, विशिष्ट अतिथि आर्ट कॉलेज की प्राचार्या डॉ. राखी, मूर्तिकार पिंटू प्रसाद एवं बिहार म्यूजियम के एडिशनल डायरेक्टर अशोक कुमार सिन्हा थे. सभी ने झेलम गर्ग की प्रस्तुति को लोक संस्कृति और आधुनिक कला का सुंदर संगम बताया. उन्होंने मिथिलांचल के ब्राह्मण समाज की नवविवाहिता महिलाओं के प्रसिद्ध मधुश्रावणी व्रत से जुड़ी शिव-पार्वती की बेटियों जया, विषहर, शामिलबारी, देव एवं दोतली को आकर्षक बॉर्डर के बीच अत्यंत सजीव रूप में उकेरा. पेंटिंग में मछलियों, कमल के फूलों एवं अन्य जीव-जंतुओं का समावेश कर उन्होंने इसे और प्रभावशाली बनाया. उनकी कृति की विशेषता यह रही कि रंगों के माध्यम से पूरी लोककथा सजीव हो उठी. अतिथियों के आग्रह पर झेलम गर्ग ने मधुश्रावणी की कथा भी सुनायी. जिससे दर्शक भावविभोर हो गए. इस कार्यक्रम में उनकी कला के साथ मुंगेर जिले को भी विशिष्ट स्थान मिला.
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