नशे की प्रवृत्ति पर रोक लगा सामाजिक सद्भाव को दे सकते हैं बढ़ावा : कुलपति

Author Amit jha
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नशे की प्रवृत्ति पर रोक लगा सामाजिक सद्भाव को दे सकते हैं बढ़ावा : कुलपति

एनएसएस इकाई ने सिंडिकेट हॉल में सद्भावना दिवस के रूप में मनायी पूर्व पीएम राजीव गांधी की जयंती

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एनएसएस: कनेक्टिंग यूथ टू कम्यूनिटी पुस्तक का हुआ विमोचन

प्रतिनिधि, मुंगेर

देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व राजीव गांधी की जन्म जयंती बुधवार को मुंगेर विश्वविद्यालय एनएसएस इकाई ने सिंडिकेट हॉल में सद्भावना दिवस के रूप में मनायी. इसका विषय यूथ कम्यूनिटी एंड नशा मुक्ति अभियान था. इसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो संजय कुमार ने की. वहीं कार्यक्रम का संयोजन और संचालन एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक मुनींद्र कुमार सिंह ने किया. विशिष्ट वक्ता के रूप में डीएसडब्ल्यू प्रो देवराज सुमन और कुलसचिव प्रो घनश्याम राय थे. मुख्य वक्ता के रूप में सीनेट सदस्य सह डीन मानविकी संकाय प्रो भवेश चंद्र पांडेय थे. बीज वक्तव्य ओएसडी डॉ प्रियरंजन तिवारी ने किया. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया. इसके बाद डॉ अनीस अहमद और डॉ मुनींद्र कुमार सिंह ने लिखित स्नातक सेमेस्टर-4 के एईसी के लिए तैयार की गयी पाठ्य पुस्तक एनएसएस : कनेक्टिंग यूथ टू कम्यूनिटी का सभी वक्ताओं और अतिथियों ने विमोचन किया.

मौके पर डॉ प्रियरंजन तिवारी ने कहा कि आज राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर हम उस युवा संकल्पना को याद कर रहे हैं, जो हमारे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सोच और चिंतन से प्रेरित था. वे वैज्ञानिक सोच के धनी थे, किंतु क्षेत्रवाद, भाषावाद, आतंकवाद से लड़ते हुए कर्मभूमि को छोड़ गये. उनकी जयंती के अवसर पर हम यह संकल्प लेते हैं कि अतिवाद व नशे से मुक्त होकर नये भारत की रचना में सहयोगी होंगे. कुलपति ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना ने विश्वविद्यालय के छात्रों में जिस तरह सेवा भाव जागृत किया है. उससे उम्मीद है कि हम न केवल प्रत्येक तरह के नशे की प्रवृत्ति पर रोक लगा सकेंगे, वरन सामाजिक सद्भाव को भी अपने सेवा के माध्यम से बढ़ा सकेंगे. कॉलेज स्तर पर सभी एनएसएस स्वयंसेवक और स्वयंसेविका अपने अनुज छात्रों को, जो स्कूली शिक्षा के बाद कॉलेज में आ रहे हैं. उनका मार्गदर्शन करें और परिसर के माहौल को नशा मुक्त बनाने के साथ सद्भावना युक्त भी बनाने की कोशिश करें.

आज की किशोर और युवा पीढ़ी को मोबाइल का नशा

मुख्य वक्ता ने नशे के अर्थशास्त्र, दर्शनशास्त्र, राजनीति, साहित्य और समाजशास्त्र पर बात की. उन्होंने कहा कि समाज में कई लोग अलग-अलग तरह के नशे में हैं. किसी को जाति का नशा है, किसी को धर्म का नशा है, किसी को पद का नशा है. इससे मुक्ति की ओर जाने से ही समाज में सद्भाव बढ़ सकता है. डीएसडब्ल्यू ने कहा कि आज की किशोर और युवा पीढ़ी को मोबाइल का नशा है. मोबाइल की लत यह है कि अच्छी सूचनाएं देखने में उनकी रुचि नहीं है और रील्स देखने में घंटों बिता देते हैं. जबकि वे अपने व्यक्तित्व विकास में उसका सकारात्मक उपयोग कर सकते थे. कुलसचिव ने कहा कि समाज का सद्भाव इसलिए बिगड़ा है, क्योंकि कुछ लोगों को जाति का नशा है तो कुछ लोगों को धर्म का नशा होता है. जिसके कारण धार्मिक वैमनस्यता फैलायी जाती है. मौके पर डॉ वंदना कुमारी, डॉ चन्दन कुमार, डॉ राजेश कुमार सिंह, डॉ संजीव कुमार, मो. तबारक अंसारी, सुमंत कुमार, प्रीतम, रंजन, आशुतोष, स्नेहा, राजा, अभय, प्रीति, केशव, अनुष्का, रिया, निशिता, निधि, कोमल, निरंजन, पिंकी, राधिका, मनीषा, राजनंदनी, प्रिया, मनीष आदि मौजूद थे.

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अमित झा

लेखक के बारे में

By अमित झा

अमित झा प्रिंट माध्यम में 06 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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