सनातन के प्रति लोगों का झुकाव बढ़ा: श्रीमहंत महेश्वर दास

Updated at : 25 May 2024 11:20 PM (IST)
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पिछले 10 वर्षों के दौरान सनातन के प्रति लोगों का झुकाव बढ़ा है. उनकी आस्था बढ़ी है. कट्टरता को हम स्थान नहीं देते.

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जमालपुर. पिछले 10 वर्षों के दौरान सनातन के प्रति लोगों का झुकाव बढ़ा है. उनकी आस्था बढ़ी है. कट्टरता को हम स्थान नहीं देते. हम तो यही जानते हैं कि हम अपने धर्म का पालन करें और जो दूसरे धर्मावलंबी है उन्हें अपने धर्म का पालन करने दें. इसी सिद्धांत को लेकर सनातनी चलते हैं. ये बातें शनिवार को स्थानीय श्री योग माया बड़ी दुर्गा स्थान में श्री सत् पंच परमेश्वर पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन भ्रमणशील जमात के श्रीमहंत महेश्वर दास जी महाराज ने कही. मौके पर मुखिया महंत अद्वैतवानंद जी व मुखिया महंत दुर्गा दास जी उपस्थित थे. श्रीमहंत ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में उदासीन संप्रदाय का बहुत बड़ा योगदान है. गुरु राम राय मेडिकल कॉलेज देहरादून में है, तो सेल चंद्र मेडिकल कॉलेज जम्मू में है. इसके अतिरिक्त कई संस्कृत विद्यालय हैं. डिग्री कॉलेज है और विश्वविद्यालय भी है. अनेक इंटर कॉलेज व डिग्री कॉलेज स्थापित किए गए हैं. वाराणसी में बहुत बड़ा संस्कृत विद्यालय है. जहां किसी भी जाति- धर्म के प्रतिभावान बच्चे विद्या अध्ययन करते हैं. हरिद्वार में आवासीय संस्कृत विद्यालय है. जहां 150 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं. उन्होंने कहा कि बिहार का इतिहास बड़ा धार्मिक रहा है. यह पूछे जाने पर की धर्मांतरण को कैसे रोका जाए उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य समाज भूल चुका है. हम लोग उसे जगाने की कोशिश कर रहे हैं. शिक्षा का मतलब एकमात्र यह रह गया है कि कैसे हमारे बच्चे पढ़ कर नौकरी करें. उसमें नैतिकता और अनैतिकता का कोई सवाल नहीं रहा है. सरकार शिक्षा को स्वरोजगार से नहीं जोड़ पाई है. वर्तमान शिक्षा पद्धति रोजगार परक नहीं बल्कि नौकरी पारक है. ऐसे में हम लोगों को सोचना है कि हमें अपने बच्चों को मशीन बनाना है या इंसान बनना है. यदि इंसान बनना है तो हमें अपने बच्चों को वैसे संस्थान में पढ़ाना चाहिये जहां उन्हें नैतिक बांध बनाया जाता है. धर्मांतरण की समस्या का एक मूल कारण गरीबी भी है.

आयुर्वेद का विस्तार लगभग 600% हुआ

उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों के दौरान आयुर्वेद का विस्तार लगभग 600% हुआ है. एलोपैथी चिकित्सा भी आवश्यक है. परंतु यदि हम योग और आयुर्वेद का आरंभ से ही आश्रय लेते हैं. तो हमें एलोपैथिक चिकित्सा की जरूरत नहीं पड़ेगी. योग आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा जननी है. जिस पर हम लोग काम करते हैं. बीएचयू में बड़ा आयुर्वेद चिकित्सा तैयार किए जाते हैं. जहां आयुर्वेद में एमडी की उपाधि मिलती है. रामदेव बाबा के यहां भी और गीता प्रेस गोरखपुर में भी एमडी कराया जाता है.

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