मुंगेर विश्वविद्यालय बन रहा करोड़पति, कॉलेजों में विकास के लिये राशि का अभाव

Updated at : 28 Jul 2024 6:46 PM (IST)
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मुंगेर विश्वविद्यालय बन रहा करोड़पति, कॉलेजों में विकास के लिये राशि का अभाव

एमयू के महिला कॉलेजों की स्थिति अधिक बदहाल

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एमयू के महिला कॉलेजों की स्थिति अधिक बदहाल, आंतरिक स्त्रोत का विकल्प नहीं, प्रतिनिधि, मुंगेर. छात्र-छात्राओं के लिये बेहतर शिक्षा का दावा करने वाला मुंगेर विश्वविद्यालय लगातार विभिन्न शैक्षणिक प्रक्रियाओं में विद्यार्थियों से शुल्क लेकर करोड़पति बन रहा है. वहीं एमयू के कॉलेज अपने विकास के लिये राशि के अभाव से जूझ रहे हैं. क्योंकि सरकार द्वारा छात्राओं तथा एससी-एसटी वर्ग के सभी छात्र-छात्राओं के नामांकन शुल्क को माफ कर दिया गया है. सबसे बदहाल हालत तो एमयू के महिला कॉलेजों की है, जिनके पास आंतरिक स्त्रोत के रूप में राशि उपलब्ध करने की लगभग सभी संभावनाएं समाप्त हो चुकी हैं. एमयू द्वारा साल 2019 से ही अपने सभी सत्रों की शैक्षणिक प्रक्रिया यूएमआईएस पोर्टल द्वारा ऑनलाइन संचालित की जा रही है. इसमें विद्यार्थियों से ली जाने वाली राशि के तहत केवल नामांकन शुल्क की राशि ही कॉलेजों को दी जाती है, जबकि शेष शैक्षणिक प्रक्रिया जैसे नामांकन के लिये आवेदन, रजिस्ट्रेशन, परीक्षा फॉर्म भरने के लिये निर्धारित शुल्क विश्वविद्यालय द्वारा ही लिया जाता है.

कॉलेजों के पास नहीं है आंतरिक स्त्रोत का

विकल्प

केवल नामांकन शुल्क की राशि के अतिरिक्त एमयू के कॉलेजों के पास आंतरिक स्त्रोत का कोई अन्य विकल्प नहीं है. ऐसे में वैसे कॉलेज, जहां छात्र नामांकित हैं, उनके पास प्रत्येक शैक्षणिक सत्र के दौरान कुछ राशि आ जाती है, लेकिन सबसे बुरी स्थिति एमयू के महिला कॉलेजों की हैं. जहां केवल छात्राएं ही नामांकित हैं. ऐसे में इन कॉलेजों को किसी भी शैक्षणिक सत्र के दौरान नामांकन शुल्क तक नहीं मिल पाता है. कुल मिलाकर कहा जाये तो अपने विकास के लिये एमयू के कॉलेजों के पास राशि लगभग शून्य है. इस कारण कॉलेजों में छात्र-छात्राओं को समुचित सुविधा उपलब्ध कराने के लिये भी कॉलेज प्रशासन को या तो विश्वविद्यालय या अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों या सामाजिक कार्यकर्ताओं के भरोसे रहना पड़ता है.

एमयू और उसके एजेंसी कमा रहे

करोड़ों रुपये

एक ओर जहां कॉलेज अपने छात्र-छात्राओंं को समुचित सुविधा उपलब्ध कराने के लिये राशि के अभाव से जूझ रहा है. वहीं एमयू प्रशासन और विश्वविद्यालय के यूएमआईएस पोर्टल पर पेमेंट गेटवे एजेंसी प्रत्येक शैक्षणिक सत्र के दौरान करोड़ों रुपये कमा रही है. बता दें कि एमयू द्वारा मई से जुलाई के बीच सत्र 2024-28 स्नातक सेमेस्टर-1, सत्र 2023-27 स्नातक सेमेस्टर-2, सत्र 2022-25 स्नातक पार्ट-2 सहित पीजी सेमेस्टर-2, एलएलबी सेमेस्टर-2, 4, 6 सहित कई सत्रों के लिये नामांकन सहित अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाएं पूर्ण की गयी. इसमें एमयू द्वारा करीब 5 करोड़ से अधिक रुपये की राशि विद्यार्थियों से विभिन्न प्रकार के शुल्क के रूप में लिया गया. वहीं इस दौरान प्रत्येक सत्र के लिये शुल्क भरने के दौरान लगने वाले पेमेंट गेटवे शुल्क के रूप में संबंधित एजेंसी द्वारा करीब 40 लाख रुपये विद्यार्थियों से लिया गया.

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