मुंगेर का चंडिका स्थान : जहां गिरी थी मां सती की बाईं आंख, जानिए क्यों देश के प्रमुख शक्तिपीठों में है शामिल

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चंडिका स्थान मुंगेर | Prabhat Khabar Network

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Munger Chandika Sthan : मुंगेर का चंडिका स्थान बिहार और देश भर के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र है. यहां मां सती की बाईं आंख गिरी थी, जिसके कारण यह प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है.

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Munger Chandika Sthan : मुंगेर का चंडिका स्थान बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. इस शक्तिपीठ में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता चंडिका के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के कारण इस मंदिर का विशेष महत्व है और सालभर यहां भक्तों का आना-जाना लगा रहता है.

यहीं गिरी थी मां सती की बाईं आंख

पौराणिक मान्यता के अनुसार जब भगवान शिव के अपमान से आहत होकर माता सती ने यज्ञ कुंड में अपने प्राण त्याग दिए थे, तब भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तांडव करने लगे. इसी दौरान भगवान विष्णु ने सृष्टि की रक्षा के लिए सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के कई खंड किए. मान्यता है कि माता सती की बाईं आंख मुंगेर के चंडिका स्थान पर गिरी थी. इसी कारण यह स्थान देश के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है. यहां मां चंडिका का दिव्य नेत्र पहाड़ की एक गुफा के भीतर विराजमान है और उसी के ऊपर भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है.

एक ही परिसर में कई देवी-देवताओं के मंदिर

चंडिका स्थान शक्तिपीठ की विशेषता यह भी है कि यहां मां चंडिका के अलावा विभिन्न देवी-देवताओं के अलग-अलग मंदिर भी स्थित हैं. श्रद्धालु एक ही परिसर में कई देवी-देवताओं के दर्शन कर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं. यही वजह है कि यह मंदिर धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक साधना का भी प्रमुख केंद्र माना जाता है.

नवरात्र में उमड़ पड़ता है आस्था का सैलाब

वैसे तो चंडिका स्थान में पूरे वर्ष श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन शारदीय और चैत्र नवरात्र के दौरान यहां भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है. मंदिर में दर्शन के लिए लंबी-लंबी कतारें लगती हैं और पूरा परिसर माता के जयकारों से गूंज उठता है. मंदिर की घंटियों की मधुर ध्वनि और भक्तों की श्रद्धा पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती है. दूर-दराज के राज्यों से आने वाले श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर माता चंडिका का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं.


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राणा गौरी शंकर

लेखक के बारे में

By राणा गौरी शंकर

राणा गौरी शंकर प्रिंट माध्यम में 32 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक आज से की. अभी प्रभात खबर के मुंगेर कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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