मॉडल अस्पताल में अब तक शिप्ट नहीं हो पाया इमरजेंसी वार्ड व ओपीडी, हैंडओवर के पेंच में फंसा मामला

Updated at : 18 Feb 2025 6:51 PM (IST)
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मॉडल अस्पताल में अब तक शिप्ट नहीं हो पाया इमरजेंसी वार्ड व ओपीडी, हैंडओवर के पेंच में फंसा मामला

मॉडल अस्पताल के तीसरे तल पर चल रहा कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है.

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– 5 फरवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था मॉडल अस्पताल का लोकार्पण

– अलग-अलग जगहों पर इलाज और जांच के लिए दौड़ रहे मरीज, हो रहे परेशान

मुंगेर

स्वास्थ्य विभाग में आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन इसका समुचित लाभ मुंगेर के लोगों को नहीं मिल पा रहा है. 5 फरवरी को सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सदर अस्पताल में लगभग 32 करोड़ की लागत से बने 100 बेड के मॉडल अस्पताल का उद्घाटन तो कर दिया, लेकिन उद्घाटन के 13 दिन बाद भी अबतक यह अस्पताल मरीजों के लिए आरंभ नहीं हो पाया है. जबकि अलग-अलग जगहों पर इलाज और जांच के लिये अस्पताल परिसर में मरीजों को दौड़ लगाना पड़ता है.

उद्घाटन के बाद भी प्रारंभ नहीं हो पाया मॉडल अस्पताल

सदर अस्पताल में 5 फरवरी को मुख्यमंत्री ने मॉडल अस्पताल का उद्घाटन किया था. उद्घाटन के बाद वैसे तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा इसमें पहले 12 बेड वाले इमरजेंसी सह आईसीयू वार्ड तथा ओपीडी वार्ड का संचालन आरंभ होना था, लेकिन उद्घाटन के 13 दिन बाद भी अबतक मॉडल अस्पताल में लगा ताला न तो मरीजों के लिए खुल पाया है और न ही अबतक मॉडल अस्पताल में इमरजेंसी सह आईसीयू तथा ओपीडी सेवा आरंभ हो पायी है.

हैंडओवर के पेंच में फंसा मामला

मॉडल अस्पताल को मरीजों के लिए आरंभ करने का मामला हैंडओवर के पेंच में फंस गया है. बता दें कि अबतक मॉडल अस्पताल के तीसरे तल पर चल रहा कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है. वहीं बीएमआईसीएल द्वारा अबतक मॉडल अस्पताल स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं किया गया है. जिसके कारण स्वास्थ्य विभाग अबतक मॉडल अस्पताल में सेवाएं आरंभ नहीं कर पाया है. जिसके कारण सबसे अधिक परेशानी मरीजों को उठानी पड़ रही है.

कहते हैं बीएमआईसीएल के अधिकारी

बीएमआईसीएल के अधिकारी सुमित कुमार ने बताया कि तीसरे तल पर कुछ कार्य शेष रह गया था. जिसे एक सप्ताह में पूर्ण कर मॉडल अस्पताल को हैंडओवर कर दिया जायेगा.

कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक

सदर अस्पताल उपाधीक्षक डा. रमन कुमार ने बताया कि अबतक मॉडल अस्पताल हैंडओवर नहीं किया गया है. जिसके कारण अबतक यहां वार्डों को शिफ्ट नहीं किया गया है. हैंडओवर के बाद पहले इमरजेंसी तथा ओपीडी सेवा को शिफ्ट किया जायेगा. जिसके बाद अन्य वार्डों को शिफ्ट किया जायेगा.

अलग-अलग जगहों पर इलाज और जांच के लिए दौड़ रहे मरीज

मुंगेर – जी 3 भवन वाले मॉडल अस्पताल का निर्माण ऐसा किया गया है कि एक ही भवन में मरीजों को सभी प्रकार की अत्याधुनिक सुविधा मिल जायेगी. लेकिन हैंडओवर के पेंच में मामला फंसने के कारण सदर अस्पताल में मरीजों को अपने इलाज और जांच के लिए एक जगह से दूसरे जगह दौड़ना पड़ रहा है. जबकि 100 बेड मॉडल अस्पताल मिलने के बावजूद भी मुंगेर सदर अस्पताल में मरीजों को अबतक पुराने और जर्जर भवन वाले वार्डों में इलाज कराना पड़ रहा है. इतना ही नहीं ओपीडी में इलाज के बाद मरीजों को एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड सहित अन्य जांच के लिए जहां लगभग 100 मीटर चलकर अस्पताल आना पड़ता है. वहीं अस्पताल में भर्ती मरीजों को अपना पैथोलॉजी जांच के लिये वापस 100 मीटर चलकर प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल जाना पड़ता है.

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