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दो साल बाद भी पीजी विभागों के लिए फाइलों से बाहर नहीं निकल पाया महानुभावों के चेयर का प्रस्ताव

Updated at : 03 Jan 2026 7:07 PM (IST)
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दो साल बाद भी पीजी विभागों के लिए फाइलों से बाहर नहीं निकल पाया महानुभावों के चेयर का प्रस्ताव

खुद कुलाधिपति ने भी की थी प्रशंसा

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22 नवंबर 2023 को एमयू के पहले एकेडमिक सीनेट के दौरान प्रस्ताव हुआ था पारित

मुंगेर. मुंगेर विश्वविद्यालय भले ही अपने विद्यार्थियों को बेहतर उच्च शिक्षा देने का दावा करता हो, लेकिन एमयू के कई ऐसे दावे अबतक फाइलों में ही बंद पड़े हैं. उस पर अब कोई चर्चा तक नहीं होती. पीजी जैसी उच्च शिक्षा के लिए साल 2023 में एमयू के पहले एकेडमिक सीनेट के दौरान महानुभावों के चेयर स्थापित करने का प्रस्ताव पारित किया गया, ताकि विद्यार्थी अपने शोध के साथ इन महानुभावों के जीवन से प्रेरित हो सकें, लेकिन दो साल बीत जाने के बावजूद अबतक पीजी विभागों को अपने इन महानुभावों के चेयर स्थापित होने का इंतजार है. बता दें कि 22 नवंबर 2023 को एमयू मुख्यालय में पहली बार एकेडमिक सीनेट की बैठक आयोजित की गयी थी. इसकी अध्यक्षता तत्कालीन कुलाधिपति सह राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने की थी. इस दौरान पूर्व कुलपति प्रो श्यामा राय ने हिंदी विभाग में रामधारी सिंह दिनकर, पॉलिटिकल साइंस में कर्पूरी ठाकुर तथा इतिहास में श्रीकृष्ण सिन्हा के नाम का चेयर स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था. इसकी खुद कुलाधिपति ने भी प्रशंसा की थी, लेकिन एकेडमिक सीनेट बैठक के बाद तीनों महानुभावों के चेयर स्थापित करने का मामला विश्वविद्यालय के फाइलों में ही दबकर रह गया है. हाल यह है कि अब दो साल बाद इन प्रस्तावों की याद तक किसी को नहीं है.

पीजी विभागों के लिए अबतक नहीं हैं स्थायी शिक्षक व कर्मी

एमयू में उच्च शिक्षा की बदहाली का आलम यह है कि जहां एक ओर दो सालों से एमयू के पीजी विभाग अपने महानुभावों के चेयर स्थापित होने के इंतजार में है. वहीं चार साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अबतक एमयू के पीजी विभाग बिना स्थायी शिक्षक और कर्मी के ही चल रहे हैं. यह हाल तब है, जब अगस्त 2025 में ही एमयू को अपने 20 पीजी विभागों के लिए शिक्षक व कर्मियों के पदों की स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन अबतक जहां पीजी विभागों में कॉलेज के शिक्षक ही स्नातक के साथ पीजी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वहीं अबतक पीजी विभागों में कर्मियों की नियुक्ति तक नहीं है. इसके कारण उत्तरपुस्तिका संभालने से लेकर विभागों के रखरखाव की जिम्मेदारी खुद विभागाध्यक्ष या विद्यार्थी ही संभाल रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RANA GAURI SHAN

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By RANA GAURI SHAN

RANA GAURI SHAN is a contributor at Prabhat Khabar.

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