सदर अस्पताल में एंबुलेंस का नहीं चलता एसी, प्राइवेट एंबुलेंस पर मरीजों का बढ़ रहा भरोसा

Updated at : 26 Mar 2025 7:14 PM (IST)
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सदर अस्पताल में एंबुलेंस का नहीं चलता एसी, प्राइवेट एंबुलेंस पर मरीजों का बढ़ रहा भरोसा

मुंगेर सदर अस्पताल में वैसे तो 102 के पांच एंबुलेंस मरीजों के लिए उपलब्ध हैं, जिसमें एडवांस लाइफ सपोर्ट (अलसा) और बेसिक लाइफ सर्पोट (बलसा) एंबुलेंस शामिल है.

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मुंगेर. मुंगेर सदर अस्पताल में वैसे तो 102 के पांच एंबुलेंस मरीजों के लिए उपलब्ध हैं, जिसमें एडवांस लाइफ सपोर्ट (अलसा) और बेसिक लाइफ सर्पोट (बलसा) एंबुलेंस शामिल है. जिसमें मरीजों के लिए कई प्रकार की सुविधाओं के साथ एसी की सुविधा भी है, लेकिन गर्मी आरंभ होते ही अस्पताल के एंबुलेंसों में एसी चलना बंद हो गया है. जिसके कारण गर्मी में मरीजों को परेशानी होती है. सरकारी एंबुलेंस में एसी नहीं चलने से मरीजों का भरोसा प्राइवेट एंबुलेंस पर बढ़ रहा है. हालांकि संपन्न परिवार के लोग तो प्राइवेट एंबुलेंस से अपने मरीजों को लेकर चले जाते हैं, लेकिन सबसे अधिक परेशानी गरीब लोगों को होती है. जिनके मरीजों को गर्मी में बंद एंबुलेंस से ही जाना पड़ता है.

सदर अस्पताल में उपलब्ध नहीं है एक भी शव वाहन

सरकार द्वारा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के साथ एंबुलेंस की व्यवस्था सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर दी गयी है. जिले में कुल 24 एंबुलेंस हैं. जिसमें पांच एंबुलेंस सदर अस्पताल में हैं. साथ ही वैसे मरीज, जिनकी इलाज के दौरान सदर अस्पताल या जिले के अनुमंडल अस्पतालों में मृत्यु हो जाती है. वैसे मरीज के शवों को घर तक ले जाने के लिए शव वाहन की सुविधा भी दी जाती थी. लेकिन सदर अस्पताल मुंगेर में लंबे समय से शवों को लेकर जाने के लिए शव वाहन नहीं हैं.

प्राइवेट एंबुलेंस ले रहे तीन से चार हजार रुपये

सदर अस्पताल में शव वाहन नहीं होने के कारण लोगों को या तो निजी वाहन या निजी एंबुलेंस से शव को लेकर अपने घर तक ले जाना होता है. ऐसे में अपनों को खोने के गम के बाद शव को लेकर जाने के लिए मोटी राशि खर्च करना किसी के लिए भी कितना कष्टप्रद हो सकता है, इसका केवल अंदाजा ही लगाया जा सकता है. हाल यह है कि अस्पताल के बाहर खड़े निजी एंबुलेंस शवों को लेकर जाने के लिए तीन से चार हजार रुपये तक लेते हैं. सदर अस्पताल में जनवरी से मार्च के 26 दिनों में 70 से अधिक मरीजों की मौत विभिन्न कारणों से इलाज के दौरान हुई है. अब ऐसे में मरीजों के परिजनों को अपनों का शव लेकर जाने में कितनी परेशानी हुई होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.

एंबुलेंस का गैस खत्म हो गया था. जिसके कारण एसी नहीं चल रहा था, इसे ठीक कराया जा रहा है.

नैयर आजम, एंबुलेंस एजेंसी के कर्मी

1 नवंबर 2024 को ही सरकार द्वारा एंबुलेंस सेवा देने वाली एजेंसी को बदला गया है. नयी एजेंसी द्वारा अबतक शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया है. संबंधित एजेंसी को शव वाहन उपलब्ध कराने को कहा गया है. वहीं गर्मी को देखते हुए एंबुलेंस में एसी को संचालित रखने का निर्देश एजेंसी को दिया गया है.

डॉ विनोद कुमार सिन्हा, सिविल सर्जनB

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