महिला स्वास्थ्य भगवान भरोसे
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :07 Apr 2017 8:57 AM
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खानपान, पर्यावरण एवं अनियमित जीवन के कारण जहां एक ओर लोग विभिन्न प्रकार के रोगों से ग्रसित हो रहे हैं. वहीं बीमार लोगों को रोग मुक्त व स्वस्थ रखने के लिए डॉक्टर को धरती का भगवान माना जाता है. सरकारी स्तर पर प्रत्येक जिले में लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये […]
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खानपान, पर्यावरण एवं अनियमित जीवन के कारण जहां एक ओर लोग विभिन्न प्रकार के रोगों से ग्रसित हो रहे हैं. वहीं बीमार लोगों को रोग मुक्त व स्वस्थ रखने के लिए डॉक्टर को धरती का भगवान माना जाता है. सरकारी स्तर पर प्रत्येक जिले में लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं. लेकिन चिकित्सकों के घोर अभाव व चिकित्सा क्षेत्र के व्यवसायीकरण के कारण इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा. आज जब हम विश्व स्वास्थ्य दिवस मना रहे हैं तो सबसे बड़ी चिंता है कि मुंगेर जिले के लगभग 15 लाख की आबादी को स्वस्थ रखने के लिए मात्र 72 सरकारी चिकित्सक हैं.
मुंगेर : पूरी दुनिया में 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है और स्वास्थ्य महकमा इस दिन अनेक प्रकार के आयोजन भी करते हैं. लेकिन विडंबना यह है कि स्वास्थ्य का मुख्य आधार चिकित्सक की घोर कमी के कारण पूरी व्यवस्था चरमरा सी गयी है. मुंगेर जिले के सरकारी अस्पतालों में मात्र एक महिला रोग विशेषज्ञ चिकित्सक हैं. वह भी मुख्यालय के बजाय तारापुर में पदस्थापित है. जाहिर है कि मुंगेर की आधी आबादी की स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे ही चल रहा है.
23437 लोगों पर मात्र एक चिकित्सक
यूं तो चिकित्सकों की कमी का दंश देश भर की जनता झेल रही है़ किंतु मुंगेर में इसका प्रभाव कुछ अधिक ही है़ मालूम हो कि जिले की आबादी लगभग 15 लाख है़ जिसके लिए कुल 109 चिकित्सकों का पद स्वीकृत किया गया है़ किंतु वर्तमान समय में जिले भर में कुल 39 चिकित्सकों का पद रिक्त है और पदस्थापित 72 चिकित्सकों में से 8 विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारियों के पद पर नियुक्त हैं. ऐसे में देखा जाये तो सिर्फ 64 चिकित्सकों के कंधों पर ही जिले की 15 लाख आबादी के चिकित्सा की जिम्मेदारी है़ जिससे यह स्पष्ट है कि जिले में 23,437 लोग एक चिकित्सक के भरोसे अपना इलाज करवाने को विवश हैं. जबकि राष्ट्रीय आंकड़ा के अनुसार देश में 1722 लोगों पर एक चिकित्सक उपलब्ध है.
सदर अस्पताल में नहीं है स्त्री रोग विशेषज्ञ
सरकार चाहे महिलाओं के हक की कितनी भी बातें कर लें, किंतु आजतक महिलाओं को समुचित चिकित्सा सेवा देने में भी सरकार विफल साबित हो रही है़ मालूम हो कि सदर अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ के लिए 2 पद स्वीकृत है़ किंतु पिछले एक साल से यहां एक भी स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक पदस्थापित नहीं है़ सदर अस्पताल की बात यदि छोड़ भी दें, तो जिले भर में एक मात्र तारापुर अनुमंडलीय अस्पताल में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक पदस्थापित हैं.
डायबिटीज व चर्मरोगियों के इलाज की नहीं है सुविधा
सदर अस्पताल में डायबिटीज तथा चर्मरोग से ग्रसित मरीजों के इलाज की सुविधा नहीं है़ पूर्व में यहां डायबिटीज सेंटर हुआ करता था़ किंतु वर्तमान समय में न तो यहां डायबिटीज के मरीजों के जांच की सुविधा है और न ही दवा की़ वहीं चर्मरोगियों के लिए पूर्व में अलग से ओपीडी की व्यवस्था रहती थी़ किंतु वर्तमान समय में यहां चर्मरोग विशेषज्ञ चिकित्सक का पद खाली पड़ा हुआ है़ नतीजतन डायबिटीज व चर्मरोग के इलाज के लिए मरीजों को निजी क्लिनिकों का सहारा लेना पड़ रहा है़ इस अोर ध्यान देने की निहायत ही जरूरत है.
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