नोटबंदी के बाद मुंगेर में 10.25 करोड़ की जमीन की हुई खरीद

Updated at :05 Dec 2016 6:25 AM
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नोटबंदी के बाद मुंगेर में 10.25 करोड़ की जमीन की हुई खरीद

जमीन की खरीद-बिक्री के नाम पर कालाधन को बनाया सफेद मुंगेर : मुंगेर राजा कर्ण की धरती है. जहां रोजाना सावा मन सोना दान होता था. नोटबंदी के बाद यह साबित हो गया कि मुंगेर सही मायने में धनकुबेरों की धरती है. जहां रोजाना करोड़ों-लाखों रुपये के जमीन का कारोबार नोटबंदी के बावजूद होता रहा. […]

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जमीन की खरीद-बिक्री के नाम पर कालाधन को बनाया सफेद

मुंगेर : मुंगेर राजा कर्ण की धरती है. जहां रोजाना सावा मन सोना दान होता था. नोटबंदी के बाद यह साबित हो गया कि मुंगेर सही मायने में धनकुबेरों की धरती है. जहां रोजाना करोड़ों-लाखों रुपये के जमीन का कारोबार नोटबंदी के बावजूद होता रहा. मुंगेर में 8 नवंबर को नोटबंदी के बाद अब तक 266 जमीन की रजिस्ट्री हुई है. 9 नवंबर के बाद से मुंगेर में लगभग 12 करोड़ के जमीन की खरीद हुई है. नोटबंदी के बावजूद जमीन की खरीद-बिक्री का धंधा मंदा नहीं हुआ.
प्रधानमंत्री ने 8 नवंबर की रात देश में 500 एवं 1000 के नोट का प्रचलन बंद कर दिया. चारों ओर त्राहिमाम मच गया. सरकार ने नोट बदलने से लेकर बैंक के एकाउंट से राशि निकालने तक के लिए राशि निर्धारित कर दिया. इसके कारण पैसा रहने के बावजूद शादी-ब्याह तक अटक गया. पार्टी मनाने के लिए भी लोगों के जेब में पैसा नहीं बचा. बैंक में नोट जमा करने, नोट बदलने एवं सेविंग एकाउंट से राशि निकालने के लिए लोग दिन भर बैंकों का चक्कर काटने लगे.
एटीएम पर पैसा के लिए लोगों को घंटों लाइन में खड़ा देखा जा रहा है. स्थिति अब तक सामान्य नहीं हुई, लेकिन मुंगेर में जमीन खरीद-बिक्री का धंधा मंदा नहीं हुआ. रोजाना करोड़ों मूल्य के संपत्ति की खरीद-बिक्री हुई.
कहते हैं अधिकारी: जिला उप निबंधक पदाधिकारी दिलीप कुमार दास ने बताया कि नोटबंदी के कारण दो-तीन दिनों तक जमीन रजिस्ट्री का कार्य धीमा रहा, लेकिन उसके बाद व्यवस्था में सुधार हुआ. पहले की अपेक्षा नोटबंदी के बाद जमीन रजिस्ट्री में कुछ कमी है.
आंकड़ों में जमीन के कारोबार की स्थिति
नोटबंदी के 15 दिन पूर्व यानी 25 अक्तूबर से 8 नवंबर तक कुल 237 जमीन की मुंगेर, खड़गपुर एवं तारापुर में हुई. इससे सरकार को 1,48,16,344 करोड़ रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई. विभाग के साथ ही आम लोगों को लगा कि नोटबंदी का असर जमीन के खरीद-बिक्री पर पड़ेगा, लेकिन नोटबंदी का असर तीन दिन ही रहा. 9 नवंबर को जहां पांच जमीन की रजिस्ट्री हुई, जिससे सरकार को 3,06,370 रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई. वहीं 10 नवंबर को 6 जमीन रजिस्ट्री में 94,251 हजार व 11 नवंबर 7 जमीन रजिस्ट्री में 5,520,196 लाख रुपये की प्राप्ति हुई. इसके बावजूद जमीन का कारोबार संभलने में समय नहीं लगा और 12 नवंबर से जमीन रजिस्ट्री का आंकड़ा दहाई अंक पार करने लगा.
9 से 24 नवंबर तक 189 जमीन की रजिस्ट्री हुई और इससे सरकार को 1,02,57,314 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति हुई. 25 से 29 नवंबर के बीच सिर्फ मुंगेर में 57 जमीन की रजिस्ट्री हुई. इससे सरकार को 26,93,365 लाख रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई. अधिकांश जमीन की खरीद-बिक्री शहरी क्षेत्र में हुई.
एक करोड़ की जमीन भी बिकी
नोटबंदी के बाद 10 लाख से अधिक वैल्यू वाले जमीन की भी खूब बिक्री हुई. नोटबंदी के बाद 39 ऐसे जमीन की रजिस्ट्री हुई, जिसका भेल्वेशन सरकारी दस्तावेज में 10 लाख से अधिक का है. मुंगेर के शादीपुर में एक जमीन 1 करोड़ 11 लाख रुपये मूल्य की रजिस्ट्री हुई. इसके अलावा 25 से 40 लाख भेल्वेशन की जमीन की रजिस्ट्री हुई.
25 अक्तूबर से 8 नवंबर तक कुल रजिस्ट्री 237, कुल राशि : 14,81,65,000, प्राप्त राजस्व : 1,48,16,344
9 नवंबर से 24 नवंबर तक कुल रजिस्ट्री 189,कुल राशि : 10,25,73,000, प्राप्त राजस्व: 1,02,57,314
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