सफलता शराबबंदी की, कहानी मुंगेर से : अब प्रमिला के साथ उसका पति नहीं करता है मारपीट
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Oct 2016 6:25 AM
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हर के दो नंबर गुमटी निवासी प्रमिला देवी लोगों के घर में दाई का काम कर जीवनयापन करती थी. पति रुदल मांझी मजदूरी करते थे. पति जो भी कमाते थे, उसे शराब में ही उड़ा दिया करते थे. अपनी कमाई तो उड़ाते ही थे, प्रमिला के पैसे भी नजर रहती थी. इस कारण घर में […]
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हर के दो नंबर गुमटी निवासी प्रमिला देवी लोगों के घर में दाई का काम कर जीवनयापन करती थी. पति रुदल मांझी मजदूरी करते थे. पति जो भी कमाते थे, उसे शराब में ही उड़ा दिया करते थे. अपनी कमाई तो उड़ाते ही थे, प्रमिला के पैसे भी नजर रहती थी. इस कारण घर में मारपीट होता था. यह सिलसिला दस वर्ष से चल रहा था. जब सरकार ने शराबबंदी की घोषणा की तो उसे आस जगी. अब प्रमिला की जिंदगी बदल गयी है.
प्रमिला ने कहा कि शराबबंदी के समय जब शहरी क्षेत्र में शराब दुकान खुलने की बात हुई तो प्रमिला विरोध करनेवालों में शामिल थी. जब पूरे राज्य में शराब की बिक्री बंद हो गयी है तो मुझे लगा कि वह कोई सपना देख रही है. शराबबंदी के बाद शहर में शराब मिलना बंद हुआ तो कुछ दिन तक रुदल बीमार रहा. अब उसका स्वास्थ्य ठीक हो गया है. प्रमिला कहती है कि आज मेरा परिवार हंसता-खेलता जीवन जी रहा है. तीनों बच्चों को पति समय भी देते हैं. वहीं शराब व्यवसाय से जुड़े लोगों ने भी नयी जिंदगी शुरू कर दी है.
शहर के मकसपुर निवासी धर्मेंद्र मंडल वर्ष 2007 से शराब का कारोबार कर रहा है. उसके शराब दुकान में आधे दर्जन लोग काम करते थे. सरकार ने जब 5 अप्रैल से शराबबंदी की घोषणा की तो सभी बेरोजगार हो गये. धर्मेंद्र मंडल ने बताया कि एक माह तक यह सोचता रहा कि आखिर किस कारोबार में हाथ डाले, जो मुंगेर में चल पड़ेगा. काफी सोच विचार कर एवं मित्रों की सलाह पर मैंने मई माह में संध्या स्वीट्स के नाम से दुकान खोला.
मुझे इस व्यवसाय का अनुभव नहीं था. बावजूद मैंने स्वीट्स कार्नर खोल दिया. विश्वास से कई ज्यादा रिस्पांस मिला और आज यह एक प्रतिष्ठित व्यापार मुझे लगने लगा. सदर प्रखंड के डीह गांव निवासी श्रीनिवास मंडल पिछले 10 वर्षों से शराब का कारोबार कर रहा था. पूर्ण शराबबंदी के बाद वह बेरोजगार हो गया. शिक्षा से उनका काफी लगाव था और उसी शराब की दुकान में स्टेशनरी की दुकान खोल ली.
आज स्टेशनी के साथ ही वह फोटो कॉपी, लेमिनेशन एवं आधार कार्ड बनाने का काम करता है. पुन: उस दुकान में दो से तीन लोगों को उसने रोजगार दिया. श्रीनिवास मंडल बताता है कि आमदनी कम है लेकिन यह एक प्रतिष्ठित व्यापार है. मैं इस व्यापार से काफी खुश हूं.
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