चिथरे बेडों पर खुल रही है नन्हीं जानों की आंखें
चिथरे बेडों पर खुल रही है नन्हीं जानों की आंखें महिला सर्जिकल वार्ड में एक भी बेड नहीं है उपयोग के लायक फोटो संख्या : 2फोटो कैप्सन : प्रसव वार्ड में जर्जर बेड प्रतिनिधि, मुंगेरयूं तो सदर अस्पताल के किसी भी वार्ड में बेड की स्थिति अच्छी नहीं है. किंतु प्रसव केंद्र एक ऐसा वार्ड […]
चिथरे बेडों पर खुल रही है नन्हीं जानों की आंखें महिला सर्जिकल वार्ड में एक भी बेड नहीं है उपयोग के लायक फोटो संख्या : 2फोटो कैप्सन : प्रसव वार्ड में जर्जर बेड प्रतिनिधि, मुंगेरयूं तो सदर अस्पताल के किसी भी वार्ड में बेड की स्थिति अच्छी नहीं है. किंतु प्रसव केंद्र एक ऐसा वार्ड है जहां जन्म लेने के बाद नन्हीं जान पहली बार दुनिया में आंख खोलती है. किंतु यहां भी चिथड़े बेडों पर ही उनकी आंखें खुल रही. महिला सर्जिकल वार्ड में एक भी बेड सही नहीं है. 13 बेड का है प्रसव केंद्र सदर अस्पताल के प्रसव केंद्र में दो कमरे हैं जिसमें प्रसव पूर्व व प्रसव के उपरांत महिलाओं को जगह दिया जाता है. एक कमरे में पांच बेड तथा दूसरे कमरे में आठ बेड लगे हैं. किंतु उनमें आधे से अधिक बेड चिथरे हो चुके हैं. जिस पर मरीजों को लिटाने का मतलब उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने के बराबर है. उस बेड पर न सिर्फ गर्भवती व धातृ महिलाओं को लिटाया जाता है, बल्कि नवजात को भी वही चिथरे बेड नसीब हो रहे जो संक्रमण के दृष्टिकोण से काफी घातक है. बदहाल है महिला सर्जिकल वार्ड कहने को तो महिला सर्जिकल वार्ड में कुल 12 बेड लगे हैं. किंतु वार्ड में एक भी बेड मरीजों के लायक नहीं है. बार्ड में उपलब्ध बेडों में से अधिकांश के गद्दे फट चुके हैं. जिसके गद्दे ठीक भी हैं तो वह फर्श से सट चुका है. जिसे मरीजों के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता. सर्जिकल वार्ड में मुख्य रूप से घायल मरीजों को भरती किया जाता है. किंतु बेडों की बदतर स्थिति के कारण मरीजों को खासे परेशानियों का सामना करना पड़ता है.कहते हैं मरीजप्रसव केंद्र में भरती चंडी स्थान निवासी मरीज बिंदू देवी ने कहा कि बेड के फट जाने के कारण गद्दे के भीतर से नारियल का रेसा बाहर निकल गया है. जो लेटने के दौरान चुभता है. महिला सर्जिकल वार्ड में भरती हवेली खड़गपुर निवासी बबीता देवी ने बताया कि वार्ड में एक भी बेड मरीजों के लायक नहीं है. कोई बेड फट कर बरबाद हो गया है तो कोई घिसते- घिसते जमीन में सट गया है.कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षकअस्पताल उपाधीक्षक डॉ राकेश कुमार सिन्हा ने बताया बेड के लिए फिलहाल कोई फंड उपलब्ध नहीं है. फंड आने के बाद नये बेडों की व्यवस्था की जायेगी.
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