वर्षों से नहीं हो रही विसरा की जांच, कांडों का अनुसंधान प्रभावित

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वर्षों से नहीं हो रही विसरा की जांच, कांडों का अनुसंधान प्रभावित फोटो संख्या : 23फोटो कैप्सन : पोस्टमार्टम हाउस में रखा विसरा प्रतिनिधि, मुंगेर सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में पड़े विसरा को वर्षों से जांच के लिए एफएसएल लैब नहीं भेजा जा रहा है. जिसके कारण कई महत्वपूर्ण कांडों का अनुसंधान जांच रिपोर्ट […]

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वर्षों से नहीं हो रही विसरा की जांच, कांडों का अनुसंधान प्रभावित फोटो संख्या : 23फोटो कैप्सन : पोस्टमार्टम हाउस में रखा विसरा प्रतिनिधि, मुंगेर सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में पड़े विसरा को वर्षों से जांच के लिए एफएसएल लैब नहीं भेजा जा रहा है. जिसके कारण कई महत्वपूर्ण कांडों का अनुसंधान जांच रिपोर्ट के अभाव में प्रभावित हो रहा है. वहीं वर्षों पुराना भेसरा रख-रखाव के अभाव में अपनी गुणवत्ता भी खो चुका है.वर्षों से नहीं हो रहा विसरा का जांचसदर अस्पताल में मुंगेर जिला के अलावे लखीसराय, शेखपुरा व रेल थाना क्षेत्र में पाये जाने वाले शवों का पोस्टमार्टम सदर अस्पताल मुंगेर में ही किया जाता है. पोस्टमार्टम के दौरान संदेहास्पद मामले खासकर प्वॉयजनिंग केस में शव का भेसरा सुरक्षित रखा जाता है और उसे संबंधित पुलिस पदाधिकारी जांच के लिए एफएसएल पटना भेजता है. लेकिन यहां भेसरा को जांच के लिए नहीं भेजा जा रहा. कांडों का अनुसंधान हो रहा है प्रभावितसंदेहास्पद मौत के मामले में मृतक के शरीर से लिये गये विसरा का जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण का खुलासा हो पाता है. किंतु जब भेसरा को संबंधित थाना पुलिस द्वारा जांच के लिए फौरेंसिक लैब भेजा ही नहीं जायेगा तो मौत के कारणों का पता कैसे चल पायेगा. वर्ष 2015 में अब तक जांच में नहीं भेजे गये भेसराजिला/ थाना भेसरा की संख्यामुंगेर 13रेल थाना 1लखीसराय 3शेखपुरा 8 क्या है भेसरापोस्टमार्टम के दौरान शव के लीवर, फेफड़ा, हृदय, किडनी, किल्ली व अमाशय के छोटे- छोटे टुकड़े जांच के लिए लिये जाते हैं. इसी को भेसरा कहा जाता है. इसे सुरक्षित रखने के लिए फॉर्मलीन का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि यह खराब न हो. खासकर वैसे शव के पोस्टमार्टम के दौरान भेसरा लिया जाता है, जो संदेहास्पद हो. इसे संबंधित थाना पुलिस द्वारा जांच के लिए फॉरेंसिक लैब पटना भेजा जाता है. जिसके रिपोर्ट के आधार पर ही मौत के कारण का खुलासा हो पाता है.कहते हैं एसपी पुलिस अधीक्षक वरुण कुमार सिन्हा ने कहा कि भेसरा की जांच मुख्यत: प्वॉयजनिंग केस में ही किया जाता है. अन्य मामलों में इसकी कोई खास अहमियत नहीं है. उन्होंने कहा कि जब भी ऐसे गंभीर मामले आते हैं तो उसकी जांच जरूर करायी जाती है.

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