दर्जा इंटर स्तरीय का, पढ़ाई सर्फि माध्यमिक तक

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दर्जा इंटर स्तरीय का, पढ़ाई सिर्फ माध्यमिक तक जर्जर विद्यालय भवन से दहशत में हैं विद्यालय के छात्रफोटो संख्या : 9,10फोटो कैप्सन : इंटर स्तरीय उच्च विद्यालय सीताकुंड एवं झड़ कर गिर रहा प्लास्टर प्रतिनिधि, मुंगेर शिक्षा जगत कागजों पर तो ढेर सारी उपलब्धियां दिखा रही है. किंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर […]

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दर्जा इंटर स्तरीय का, पढ़ाई सिर्फ माध्यमिक तक जर्जर विद्यालय भवन से दहशत में हैं विद्यालय के छात्रफोटो संख्या : 9,10फोटो कैप्सन : इंटर स्तरीय उच्च विद्यालय सीताकुंड एवं झड़ कर गिर रहा प्लास्टर प्रतिनिधि, मुंगेर शिक्षा जगत कागजों पर तो ढेर सारी उपलब्धियां दिखा रही है. किंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. जिले भर में लगभग सभी विद्यालयों को इंटर स्तरीय दर्जा तो दे दिया गया है. किंतु इंटर की पढ़ाई किसी- किसी विद्यालयों में ही आरंभ हो पायी है. जिसके कारण माध्यमिक विद्यालयों में इंटर स्तरीय दर्जा कागज के फूल सा साबित हो रहा है. इतना ही नहीं विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति छात्र-छात्राओं को दहशत के माहौल में पढ़ाई करने पर विवश कर रखी है. ऐसे ही विद्यालयों में से एक है इंटर स्तरीय उच्च विद्यालय सीताकुंड. 817 छात्र-छात्राएं हैं नामांकितइंटर स्तरीय उच्च विद्यालय सीताकुंड में कुल नामांकित छात्र-छात्राओं की संख्या 817 है. वहीं विभिन्न विषयों की पढ़ाई के लिए कुल 13 शिक्षक-शिक्षिकाएं पदस्थापित है. विद्यालय में जहां संस्कृत व कंप्यूटर के शिक्षक नहीं हैं. वहीं सामाजिक विज्ञान के विषय में एक शिक्षक का पद खाली पड़ा हुआ है. जिसके कारण उक्त विषयों की पढ़ाई से छात्र- छात्राओं को वंचित रहना पड़ रहा है.दर्जा तो मिल गया, पर नहीं मिला है कोडप्रधानाध्यापक शैलेन्द्र कुमार सिन्हा ने बताया कि विद्यालय को वर्ष 2000 में ही इंटर स्तरीय दर्जा मिल चुका है. किंतु विभाग द्वारा विद्यालय को अबतक न तो इंटर का कोड निर्गत किया गया है और न ही शिक्षकों को पदस्थापित किया गया है. जिसके कारण 15 साल बीत जाने के बाद भी अबतक यहां इंटर की पढ़ाई आरंभ नहीं हो पायी है.जर्जर भवन दुर्घटना को दे रहा आमंत्रणवैसे तो विद्यालय परिसर में छह कमरे का दो मंजिला भवन का निर्माण हाल ही में बनाया गया है. जिसमें से एक कमरे में प्रधानाध्यापक का कार्यालय संचालित होता है तथा एक को स्टोर बनाया गया है. बांकी के चार कमरे में कक्षाओं का संचालन होता है. किंतु 817 छात्र- छात्राओं के लिए चार कमरे पर्याप्त नहीं हैं. जिसके कारण आधे से अधिक छात्र- छात्राओं को पुराने जर्जर भवन में पढ़ाई करना विवशता बन गयी है. पुराने भवन के छत का प्लास्टर लगातार टूट- टूट कर गिरते जा रहा है. यहां तक कि भवन का दीवार व बीम भी कई जगहों पर दरक गया है.जो एक बड़ी दुर्घटना को आमंत्रण दे रहा है. इस संबंध में प्रधानाध्यापक ने बताया कि विभाग को लिखा गया है.

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