धरहरा व हवेली खड़गपुर में चल रहा अवैध पत्थर व मोरंग का धंधा रोक के बावजूद हो

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मुंगेर : धरहरा एवं हवेली खड़गपुर में अवैध पत्थर व मोरंग उत्खनन का धंधा फल-फूल रहा है. रोक के बावजूद पत्थर माफियाओं द्वारा बड़े पैमाने पर रात के अंधेरे में उत्खनन का कार्य किया जा रहा है. जिसे रोकने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो रहा है. जिले के पहाड़ों से पत्थर उत्खनन […]

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मुंगेर : धरहरा एवं हवेली खड़गपुर में अवैध पत्थर व मोरंग उत्खनन का धंधा फल-फूल रहा है. रोक के बावजूद पत्थर माफियाओं द्वारा बड़े पैमाने पर रात के अंधेरे में उत्खनन का कार्य किया जा रहा है.

जिसे रोकने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो रहा है. जिले के पहाड़ों से पत्थर उत्खनन पर लंबे समय से रोक लगा हुआ है. जिसके कारण मुंगेर में पत्थर उद्योग पूरी तरह बंद हो गया.

जबकि दर्जनों क्रेशर बंद पड़ा हुआ है और मशीन जंग खा रही है. लेकिन खड़गपुर एवं धरहरा के पहाड़ों से आज भी पुलिस एवं नक्सलियों को मेल में लेकर माफिया बड़े पैमाने पर उत्खनन कार्य कर रहे हैं. रोजाना लाखों रुपये का पत्थर का कारोबार हो रहा है. जिसके कारण सरकार को लाखों रुपये राजस्व की क्षति हो रही है.

धरहरा के पहाड़ों का हो रहा उत्खनन

धरहरा प्रखंड में पत्थर का धंधा काफी फल फुल रहा है. बंगलवा, माताडीह, मनकोठिया, लकड़कोला, अमरासनी पहाड़, गौरेया में रात के अंधेरे में पत्थर उत्खनन का कार्य किया जाता है.

बताया जाता है कि रात के लगभग 1-2 के बीच 50 से 60 ट्रैक्टर अवैध पत्थर निकला जाता है. जिसे अंधेरे में ही गंतव्य तक पहुंचा दिया जाता है.

खड़गपुर में हो रहा

पत्थर का कटाव

हवेली खड़गपुर के ऋषिकुंड पहाड़ में भी बड़े पैमाने पर पत्थर उत्खनन का कार्य चल रहा है. बताया जाता है कि पहाड़पुर के रास्ते जहां इन पत्थरों को निकाला जा रहा है. वहीं बिलिया, जवायत के रास्ते रोजना 100 से अधिक ट्रैक्टर पत्थर लदा पार किया जाता है. इतना ही नहीं पतघाघर से अवैध मोरंग भी निकाला जा रहा है. कहा जाता है कि लाखों रुपये के रोजाना मोरंग का कारोबार होता है.

स्थानीय स्तर पर

होती है खपत

बताया जाता है कि अवैध उत्खनन कर निकाले गये पत्थर को स्थानीय स्तर पर ही खपत किया जाता है. आज भी धरहरा एवं खड़गपुर में स्थानीय पत्थर मिलता है. जिसका उपयोग गृह निर्माण के साथ ही ठेकेदार द्वारा कराये जा रहे निर्माण कार्य में किया जाता है. अगर बाहर से कोई पत्थर इस क्षेत्र में लाया जाता है तो उसे माफिया द्वारा पुलिस से पकड़ा दिया जाता है.

नक्सली व पुलिस की

है मिलीभगत

जहां जाने से पुलिस भी परहेज करती है. वहां रात के अंधेरे में पहाड़ों को तोड़ा जाता है. कहा जाता है कि पत्थर माफिया द्वारा नक्सलियों एवं पुलिस को मेल में लेकर यह धंधा किया जा रहा है.

नक्सली एवं पुलिस को बंधी बंधायी रकम दी जाती है. धरहरा में एक पत्थर माफिया द्वारा रकम देने में आना कानी की गयी तो नक्सलियों द्वारा उस पत्थर व्यवसायी का अपहरण कर लिया गया था. जिसे बाद में एक लाख रुपये के भुगतान पर छोड़ा गया था. इतना ही नहीं हाल ही में धरहरा थाना पुलिस ने एक मोरंग लदा ट्रैक्टर को भी पकड़ा था. जिसे थाने से ही छोड़ दिया गया.

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