लोक आस्था का केंद्र है मुलुकटांड़ बड़ी काली

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लोक आस्था का केंद्र है मुलुकटांड़ बड़ी काली फोटो संख्या : 6फोटो कैप्सन : बड़ी काली मंदिर मुलुकटांड़ प्रतिनिधि, हवेली खड़गपुर शारदीय नवरात्र के अवसर पर खड़गपुर अनुमंडल के विभिन्न दुर्गा मंदिरों में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना का दौर चल रहा है. वहीं मुलुकटांड़ स्थित बड़ी काली का अलग ही महत्व है. श्रद्धालु मां […]

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लोक आस्था का केंद्र है मुलुकटांड़ बड़ी काली फोटो संख्या : 6फोटो कैप्सन : बड़ी काली मंदिर मुलुकटांड़ प्रतिनिधि, हवेली खड़गपुर शारदीय नवरात्र के अवसर पर खड़गपुर अनुमंडल के विभिन्न दुर्गा मंदिरों में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना का दौर चल रहा है. वहीं मुलुकटांड़ स्थित बड़ी काली का अलग ही महत्व है. श्रद्धालु मां काली मंदिर में भी पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं और मन की मुरादें पूर्ण होने की मन्नतें मांग रहे हैं. 1864 में बड़ी मां काली मुलुकटांड़ की स्थापना की गयी. तभी से आश्विन माह में मां दुर्गा के साथ ही बड़ी मां काली की भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता है कि मां काली से भक्त जो भी अपनी मुरादें मांगते हैं मां काली उनकी मुरादे अवश्य पूरी करती है. ग्रामीण दीपक सिन्हा, बंटी सिन्हा, पंडित निरंजन मिश्रा का कहना है कि प्रतिमा पर चढ़ने वाले आभूषण व वस्त्र चढ़ाने के लिए भक्तों की लंबी कतार लगी रहती है. मां काली की विसर्जन के लिए दिये जाने वाला खोयचा नरेश सहाय एवं गिरीश सहाय के परिजनों द्वारा दिया जाता है. पुरोहित नंदेश्वर पांडेय तथा पुजारी निरंजन मिश्रा का कहना है कि मां की शक्ति असीम है. मां के आशीर्वाद से नि:संतान दंपत्तियों की झोली भर जाती है. क्षेत्र के अधिकांश प्रतिमाओं का विसर्जन मणी नदी में किया जाता है. जबकि मां काली की प्रतिमा पोखर में विसर्जित की जाती है.

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