मुंगेर बाल गृह में रहने वाले मूकबधिर बालक को छह साल बाद मिला परिवार

Updated at : 24 Jan 2020 7:45 AM (IST)
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मुंगेर बाल गृह में रहने वाले मूकबधिर बालक को छह साल बाद मिला परिवार

मुंगेर : मुंगेर बाल गृह में वर्ष 2014 से रह रहे मूकबधिर बालक अभिषेक कुमार को बाल गृह के अथक प्रयास से 6 वर्ष पूर्व अपना खोया परिवार आखिरकार मिल गया. जिसे गुरूवार को जिलाधिकारी राजेश मीणा द्वारा बालक के परिजनों को सौंप दिया गया. इसके साथ ही जिला बाल संरक्षण इकाई की सफलता में […]

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मुंगेर : मुंगेर बाल गृह में वर्ष 2014 से रह रहे मूकबधिर बालक अभिषेक कुमार को बाल गृह के अथक प्रयास से 6 वर्ष पूर्व अपना खोया परिवार आखिरकार मिल गया. जिसे गुरूवार को जिलाधिकारी राजेश मीणा द्वारा बालक के परिजनों को सौंप दिया गया. इसके साथ ही जिला बाल संरक्षण इकाई की सफलता में एक और नया अध्याय जुड़ गया.

जिसमें अबतक जिला संरक्षण इकाई द्वारा 21 बच्चों में 17 बच्चों को संबंधित जिला के बाल कल्याण समिति में स्थानांतरित एवं परिवार में पुनर्वासित किया गया. बताया जाता है कि 2014 में बालक अभिषेक कुमार को बाल कल्याण समिति लखीसराय द्वारा मुंगेर बाल गृह में भेजा गया था.
अभिषेक के बचपन से ही मूकबधिर होने के कारण जिस समय वह बाल गृह आया उसे न तो अक्षर का ज्ञान था और न ही वह अपना पता बताने में समर्थ था. जिसके कारण कई बार बाल गृह के कर्मियों द्वारा उसके परिवार को ढूंढ़ने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.
जिसके बाद अभिषेक को शुरूआती दौर में कर्मियों द्वारा इशारों की भाषा काफी मेहनत से सिखायी गई. जिसके साथ उसे अक्षर का बोध कराया गया. जिसका असर यह रहा कि अभिषेक बाल गृह के अथक प्रयास से अपना नित्य क्रिया खुद ही करना आरंभ कर अन्य बच्चों के साथ खेल में भी भाग लेने लगा.
वहीं अभिषेक के बाल गृह में रहने के दौरान नवंबर 2019 में महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन के दौरान टीवी पर महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को देखकर अभिषेक ने इशारे से बताया कि राज्यपाल उसके यहां के हैं. जिसके बाद स्पष्ट हुआ कि अभिषेक उत्तराखंड का है. जिसकी जानकारी उत्तराखंड के चाइल्ड लाइन को दी गई. उसके बाद एक दिन जमालपुर आर्मी कैंप में पदस्थापित मेजर सौरभ मल्होत्रा अपने सैनिक पोशाक में बच्चों से मिलने आये.
जिसे देखकर अभिषेक को कुछ याद आया और उसने बताया कि उसके घर के पास एक आर्मी कैंप है और वहां घुड़सवारी होती है. जिसके बाद मेजर द्वारा अपने स्तर से जानकारी प्राप्त कर बताया गया कि हेमपुर आर्मी कैंप में घुड़सवारी होती है. जिसके बाद मेजर द्वारा हेमपुर आर्मी कैंप और स्कूल के इंटरनेट के जरिये अभिषेक को दिखाया. जिसके बाद अभिषेक ने बताया कि वह इस स्कूल में पढ़ता है.
जिसके बाद हेमपुर आर्मी कैंप के मेजर द्वारा इसकी सूचना माइक द्वारा आसपास के गांवों में दी गई. जिसमें पता चला कि अभिषेक का परिवार उत्तराखंड के उद्धमसिंह जिले के चांदपुर गोपीपुर आरबीसी हेमपुर का रहने वाला है. अभिषेक के पिता भी मूकबधिर हैं. उसे एक बड़ा भाई और बड़ी बहन भी है. जिसे दूरभाष और वीडियो कॉल द्वारा परिवार से बात कराने पर अभिषेक ने अपने परिवार को पहचान लिया.
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