नि:संतान लखनऊ की दंपती ने दत्तक ग्रहण संस्थान की अनिता को लिया गोद

Updated at : 11 Dec 2019 8:24 AM (IST)
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नि:संतान लखनऊ की दंपती ने दत्तक ग्रहण संस्थान की अनिता को लिया गोद

मुंगेर : विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान ने आज तीन लोगों को नई जिंदगी दी. एक तो इस संस्थान में रह रही अनाथ मासूम बच्ची अनीता को माता-पिता मिल गया. वहीं दूसरी तरफ नि:संतान यूपी के दंपती को माता-पिता बनने का सौभाग्य मिला. दंपती बच्ची पाकर इतने अह्लादित थे कि उसने कहा कि आज मुंगेर ने […]

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मुंगेर : विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान ने आज तीन लोगों को नई जिंदगी दी. एक तो इस संस्थान में रह रही अनाथ मासूम बच्ची अनीता को माता-पिता मिल गया. वहीं दूसरी तरफ नि:संतान यूपी के दंपती को माता-पिता बनने का सौभाग्य मिला. दंपती बच्ची पाकर इतने अह्लादित थे कि उसने कहा कि आज मुंगेर ने जो जीवन का सबसे बड़ा सुख दिया, उसके कारण जिंदगी भर मुंगेर याद रहेगा.

समाहरणालय कक्ष में मंगलवार को जिलाधिकारी राजेश मीणा ने विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान में मासूम अनीता को लखनऊ के पवन दुबे एवं सुनैना दुबे को सौंपा. डीएम ने कहा कि बच्ची को आज माता-पिता मिल गये. इससे अच्छी बात हो ही नहीं सकती है. अनाथ बच्ची और नि:संतान दंपती दोनों को एक दूसरे की जरूरत थी. जिसे मुंगेर जिले ने पूरा किया है. आशा है कि दोनों मिलकर बच्ची को बेहतर जिंदगी प्रदान करेंगे.
डीएम ने अनीता को सुखद जीवन के लिए आशीर्वाद दिया और दंपती को बधाई दी. विदित हो कि अभी बच्ची को प्री एडोप्सन के तहत वर्तमान में दिया गया है. यानी लालन-पालन के लिए दोनों को जिम्मेदारी दी गयी है. आगे परिवार न्यायालय में मामला लाया जायेगा और वहां से कानूनी प्रक्रिया के तहत बच्ची को पूर्ण रूप से उक्त दंपती को गोद दिया जायेगा.
कौन है अनीता
लावारिस अवस्था में जब अनीता छह-सात दिनों की बच्ची थी तो उसे विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान लगाया गया था. जहां उसका लालन-पालन हुआ. इस संस्थान की प्रथम स्वतंत्र घोषित बालिका अनीता ही हुई. जिसका पहला जन्मोत्सव 14 सितंबर 2019 को बाल कल्याण समिति मुंगेर के कक्ष में मनाया गया. जिसमें जिलाधिकारी राजेश मीणा एवं उनकी पत्नी भी शरीक हुई थी और बच्ची को आर्शिवाद दिया था.
वर्ष 2017 में किया था आवेदन
पवन दुबे ने कहा कि वे डिफेंस में कार्यरत हैं. वर्ष 2010 में उनकी शादी सुनैना से हुई है. लेकिन शादी के कई वर्ष बाद भी उनकी कोई संतान नहीं हुई. माता-पिता नहीं बन पाने का दुख इतना था कि हमलोगों की जिंदगी ही वीरान हो गयी थी.
इसी दौरान वर्ष 2017 में बच्चा गोद लेने के लिए एक साइड पर अपना ऑनलाइन आवेदन किया. बच्चे की हमारी जिंदगी में इतना अधिक अहमियत था कि हम दोनों अपना एकाउंट हर एक-दूसरे दिन खोल कर देखते हैं कि बच्चा गोद लेने की हमारी बारी कब आयेगी.
क्योंकि साइट पर हम वेटिंग लिस्ट में थे. 10 दिन पूर्व जब साइट खोला तो हमारा वेटिंग खत्म हो गया था और मैंने ऑप्शन में टिक कर दिया. जिसके बाद मुंगेर से बच्ची को गोद लेने की सूचना व पता मेरे एकाउंट पर भेजा गया. हमने देर नहीं की और आज मुंगेर आकर बच्ची को गोद लिया. मुंगेर ने मेरे जिंदगी को आबाद कर दी. मुंगेर को हम जीवन भर नहीं भूल पायेंगे.
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