फसलें बर्बाद कर लौट रहा बाढ़ का पानी

मुंगेर : ऊफनाई गंगा शांत है और पानी भी घटने लगा है. रविवार को मुंगेर में जल-स्तर 38.51 पर स्थिर था. लेकिन रविवार की रात से पानी घटना शुरू हो गया. सोमवार को मुंगेर में गंगा का जल-स्तर 38.29 पर पहुंच गया. केंद्रीय जल आयोग की माने तो मुंगेर में गंगा के जल-स्तर में प्रति […]
मुंगेर : ऊफनाई गंगा शांत है और पानी भी घटने लगा है. रविवार को मुंगेर में जल-स्तर 38.51 पर स्थिर था. लेकिन रविवार की रात से पानी घटना शुरू हो गया. सोमवार को मुंगेर में गंगा का जल-स्तर 38.29 पर पहुंच गया. केंद्रीय जल आयोग की माने तो मुंगेर में गंगा के जल-स्तर में प्रति घंटा एक सेंटी मीटर की गिरावट दर्ज की गयी है.
बाढ़ का पानी तो लौटने लगा, जो राहत की बात है. लेकिन लोगों के लिए मुसीबत छोड़ कर जा रहा है. एक और जहां करोड़ों रुपये की फसल बर्बाद हो गयी. वहीं दूसरी ओर बाढ़ के जमे पानी में डूबने का सिलसिला शुरू हो गया है. गांव के गली व गढ्ढों में जमा पानी बीमारी को आमंत्रण देने को तैयार है.
बाढ़ का डर खत्म, पर मुसीबत बरकरार : गंगा के जल-स्तर में कमी होने के कारण एक बार पुन: भीषण बाढ़ की विभिषिका का डर तो खत्म हो गया. लेकिन निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने के कारण लोगों का मुसीबत बरकरार है. गड्ढे, ढाब एवं निचले इलाकों के गांव व गलियों में बाढ़ का पानी जमा रहने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है.
पानी जमा होने के कारण महामारी फैलने की आशंका बढ़ गयी है. लोगों में दहशत है कि अगर स्वास्थ्य विभाग की ओर से महामारी रोकने के लिए छिड़काव व अन्य व्यवस्था नहीं किया गया तो बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ने लगेंगे.
फसल बर्बाद कर लौटने लगा बाढ़ का पानी : मुंगेर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बाढ़ का पानी घुस गया. पिछले एक सप्ताह से बाढ़ का पानी जमा होने के कारण सैकड़ों एकड़ में लगी धान, मक्का एवं अन्य फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गयी. अनुमान लगाया जा रहा है कि करोड़ों की फसल एवं पशु चारे का नुकसान हुआ है.
बाढ़ का पानी सदर प्रखंड के कुतलुपुर, जाफरनगर, टीकारामपुर, कासिम बाजार थाना क्षेत्र के महद्दीपुर बहियार, डकरा सहित बरियारपुर, जमालपुर एवं धरहरा इलाके नीचले बहियार में लगी फसल बर्बाद हो गयी. जबकि बरियारपुर-खड़गपुर मुख्य मार्ग के दोनों ओर बाढ़ का पानी आने से धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गयी.
चिकित्सकों ने दी पानी को उबालकर पीने की सलाह : मुंगेर. बाढ़ से उबरे क्षेत्रों में मलेरिया, डायरिया, नेत्र और चर्मरोग जैसी बीमारी फैलने की आशंका रहती है. चिकित्सकों की मानें तो ऐसे में कई प्रकार के त्वचा रोग हो जाते हैं. इसलिए पानी को उबाल कर पीना चाहिए.
लोग शरीर में आवश्यक खनिज आपूर्ति के लिए नारियल पानी या स्वच्छ पानी का उपयोग कर सकते हैं. कई स्थानों पर लोग भू-जल पर निर्भर होते हैं. वे जीवाणु संक्रमण से छुटकारा पाने के लिए पानी में क्लोरीन मिला सकते हैं और उसी पानी को पीने के उपयोग में लायें.
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