Mulayam Singh Yadav Last Rites: रोटी कपड़ा सस्ती हो-दवा पढ़ाई मुफ्ती हो को मुलायम सिंह ने किया था आत्मसात

पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व रक्षा मंत्री, सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव सर्वजन के नेता थे. लेकिन गरीबों के लिये कुछ अलग करना उनके जीवन का उद्देश्य था. यही कारण था कि उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया के नारे ‘रोटी कपड़ा सस्ती हो-दवा पढ़ाई मुफ्ती हो' को आत्मसात किया.
Mulayam Singh Yadav News: मुलायम सिंह यादव गरीबों के नेता था. उन्होंने समाजवादी आंदोलन के महानायक डॉ. राम मनोहर लोहिया के ‘रोटी कपड़ा सस्ती हो-दवा पढ़ाई मुफ्ती हो’ को अपने मुख्यमंत्रित्व काल में यूपी में लागू किया. उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में जो काम किया वह आज भी लैंडमार्क बना हुआ है. उन्होंने लड़कियों की शिक्षा इंटर तक मुफ्त की. जिसे बाद में अन्य सरकारों ने आगे बढ़ाया.
पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अपने पहले कार्यकाल में सरकारी अस्पतालों में मरीजों का पर्चा एक रुपये का कर दिया गया था. जब उन्होंने मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाला तब पर्चा 8 रुपये का था. नियम था कि 12 प्रतिशत पर्चे का शुल्क बढ़ाया जाये. जब उन्हें यह पता चला कि गरीबों के इलाज का पर्चा 10 रुपये का होना जा रहा है तो उन्होंने शासनादेश जारी करते हुए पर्चे को एक रुपये का करते हुए फ्रीज कर दिया था. जो आज भी एक रुपये का है.
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इसके अलावा मुलायम सिंह यादव ने कई तरह की जांचें भी फ्री कर दी थी. या फिर उनके शुल्क को फ्रीज कर दिया था. जिससे हर साल उनके शुल्क में वृद्धि न की जा सके. मुलायम सिंह यादव ने यूपी को संजय गांधी पीजीआई की तर्ज पर दो बड़े चिकित्सा संस्थान दिये. जो आज भी यूपी की चिकित्सा व्यवस्था और चिकित्सा शिक्षा की रीढ़ बने हुये हैं. इससे पहले सिर्फ केजीएमयू और एसजीपीजीआई ही यूपी में इलाज के दो बड़े संस्थान थे.
मुलायम सिंह यादव जब यूपी के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में डॉ. राम मनोहर लोहिया के सपने को साकार करने का काम किया. उन्होंने लखनऊ में डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल बनवाया. जो बाद में डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज बना. आज यह चिकित्सा संस्थान यूपी में एक अलग स्थान रखता है.
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इसके अलावा लखनऊ के कानपुर रोड पर लोकबंधु राजनारायण अस्पताल बनावाया. इस अस्पताल के बनने से पहले सरोजनी नगर, बंथरा, उन्नाव व कानपुर सीमा तक मरीजों को हजरतगंज स्थित सिविल अस्पताल आना पड़ता था. लेकिन लोकबंधु राजनारायण अस्पताल के बनने से लाखों मरीजों को इलाज की सुविधा अपने घर
इसी तरह अपनी जन्मभूमि सैफई को उन्होंने यूपी रूरल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के रूप में एक चिकित्सा संस्थान दिया. इससे इटावा, फर्रुखाबाद, कन्नौज, फिरोजाबाद तक के मरीजों को आगरा मेडिकल कॉलेज जाने से निजात मिल गयी. आज यह इंस्टीट्यूट इलाज के साथ ही चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा नाम है.
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