अपहरण कर दुष्कर्म कराने के मामले में महिला को 10 वर्षों की सश्रम कारावास

Published by : SATENDRA PRASAD SAT Updated At : 23 Dec 2025 6:25 PM

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एक महिला आरोपी को दोषी पाते हुए दस वर्षों का सश्रम कारावास सहित 22 हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाई है.

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मोतिहारी. अपर सत्र न्यायालय के न्यायाधीश सह दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश मिथलेश कुमार ने एक किशोरी की अपहरण कर कई दिनों तक दुष्कर्म कराने के एक मामले की सुनवाई करते हुए एक महिला आरोपी को दोषी पाते हुए दस वर्षों का सश्रम कारावास सहित 22 हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाई है. अर्थ दंड नहीं देने पर अतिरिक्त सजा काटने का आदेश दिया है .अर्थ दंड वसूल पाए जाने पर राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया है. वहीं न्यायाधीश ने पीड़िता को पीड़ित घोषित करते हुए मुआवजा के रूप में छह लाख रुपए पीड़ित को देने के लिये विधिक सेवा प्राधिकार को आदेशित किया है. सजा सुगौली थाना के सरगम सिनेमा हॉल रोड नंबर 3 निवासी आश महम्मद मियां की पत्नी कमरुल नेशा को हुई .वहीं साक्ष्य के अभाव में एक अन्य अभियुक्त को न्यायालय ने बरी कर दिया इस मामले में शहर के छतौनी मठिया निवासी पीड़िता ने दिनांक 6 मई 2022 को सुगौली थाना कांड संख्या 212/2022 दर्ज कराई थी जिसमें कमरुल नेशा सहित तीन को नामजद की थी एवं कही थी कि एक माह पूर्व वह मठिया छतौनी से चम्पापुर अपनी ननद के यहां जाने के लिए मोतिहारी रेलवे स्टेशन से निकली थी कि करीब 7.30 रात्रि के करीब सुगौली स्टेशन पर पहुंची तो उसे एक महिला मिली उसके पूछने पर वह बताई कि रात होने के कारण वह रास्ता भूल गई है .उक्त महिला बहला फुसलाकर अपने घर सुगौली सिनेमा हॉल के पास लाई तथा उसे घर में बंद कर दी वह घर में बंद कर बाहर से ताला लगा देती थी तथा धमकी देती थी कि हल्ला करोगी तो जान से मार देंगे प्रतिदिन उसके साथ उसका पुत्र एवं बाहर के लोग उसकी यौन शोषण करने लगे इसके लिए महिला लोगों से मोटी रुपए लेती थी .पीड़िता के साथ यौन संबंध बनाने आए एक युवक से मोबाइल लेकर वह अपने ननद के पास फोन कर अपनी स्थिति बताई तब उसकी ननद पुलिस को साथ लेकर आई और उसे मुक्त कराई .पुलिस घटना स्थल से नामजद सहित तीन को गिरफ्तार की थी परंतु आरोप पत्र दो के विरुद्ध ही समर्पित की थी. पॉक्सो वाद संख्या 45/2022 विचारण के दौरान विशेष अपर लोक अभियोजक पुष्पा दुबे ने पांच गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत कर अभियोजन पक्ष रखा। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के दलीलें सुनने के बाद पॉक्सो एवं भादवि के अन्य धाराओं में उक्त सजा सुनाई है.

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