मोतिहारी में एमएस निजी हॉस्पिटल सील, जांच में नहीं मिले वैध दस्तावेज

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छापेमारी के दौरान एमएस हॉस्पिटल की जांच करती स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीम

मोतिहारी के सदर अस्पताल चौक स्थित एमएस हॉस्पिटल को स्वास्थ्य विभाग ने जांच के दौरान आवश्यक दस्तावेज नहीं मिलने पर सील कर दिया. अस्पताल पर पंजीकरण, फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र और चिकित्सकों के दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने का आरोप है. पढ़ें पूरी खबर…

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मोतिहारी से अमरेश सिंह की रिपोर्ट

Motihari News: मोतिहारी में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सदर अस्पताल चौक स्थित गली नंबर-1 में संचालित एमएस हॉस्पिटल को सील कर दिया. सिविल सर्जन के निर्देश पर गठित टीम ने गुरुवार को पुलिस बल के साथ अस्पताल में छापेमारी की और जांच के बाद तत्काल प्रभाव से अस्पताल का संचालन बंद करा दिया.

जांच में नहीं मिले आवश्यक दस्तावेज

छापेमारी के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल प्रबंधन से संचालन का पंजीकरण प्रमाणपत्र, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट, सरकारी मान्यता संबंधी दस्तावेज और अस्पताल में कार्यरत चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता से जुड़े प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने को कहा.

हालांकि निर्धारित समय के भीतर अस्पताल प्रबंधन कोई भी वैध दस्तावेज अथवा चिकित्सकों की डिग्री से संबंधित प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर सका. इसके बाद विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया.

शिकायतों के बाद हुई कार्रवाई

सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि जिले में कई निजी नर्सिंग होम और अस्पताल बिना वैध निबंधन, आवश्यक मानकों और सुरक्षा संबंधी दस्तावेजों के संचालित हो रहे हैं.

इन्हीं शिकायतों के आधार पर विशेष टीम गठित कर एमएस हॉस्पिटल में औचक निरीक्षण किया गया. उन्होंने कहा कि आगे भी ऐसे संस्थानों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा.

पीड़ित की शिकायत पर जांच शुरू

मोखलिसपुर निवासी गोविंद सिंह ने जिला चिकित्सा पदाधिकारी को आवेदन देकर एमएस हॉस्पिटल के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाए थे और अस्पताल की जांच कर कार्रवाई की मांग की थी.

आवेदन में उन्होंने आरोप लगाया था कि 10 मई 2026 को अपनी गर्भवती पत्नी को गंभीर स्थिति में एमएस हॉस्पिटल में भर्ती कराया था. अस्पताल प्रशासन ने इलाज के लिए एक लाख रुपये नकद जमा कराए, लेकिन कोई रसीद उपलब्ध नहीं कराई.

इलाज में लापरवाही का आरोप

पीड़ित का आरोप है कि इलाज के दौरान उनकी पत्नी की स्थिति लगातार बिगड़ती गई. गंभीर हालत होने पर अस्पताल प्रशासन ने उन्हें दूसरे स्थान पर भेज दिया.

परिजनों के अनुसार इस दौरान गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई. बाद में महिला की जान बचाने के लिए चिकित्सकों को ऑपरेशन कर मृत शिशु और गर्भाशय निकालना पड़ा.

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जा रही है.

आगे भी जारी रहेगा अभियान

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध दस्तावेज और आवश्यक मानकों के संचालित अस्पतालों एवं नर्सिंग होम के खिलाफ आगे भी जांच और कार्रवाई जारी रहेगी.

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