Motihari News: अस्तित्व की जंग लड़ रही ऐतिहासिक श्रीकृष्ण गोशाला, अतिक्रमण की चपेट में करोड़ों की जमीन

जर्जर गोशाला भवन
Motihari News: पूर्वी चंपारण के मधुबन में ऐतिहासिक श्रीकृष्ण गोशाला बदहाली के दौर से गुजर रही है. 1937 में स्थापित इस गोशाला की सात बीघे जमीन पर अतिक्रमण का खतरा मंडरा रहा है और संसाधनों की कमी से गायें नदारद हैं. पढ़ें पूरी खबर…
Motihari News: पूर्वी चंपारण जिले के मधुबन स्थित श्रीकृष्ण गोशाला का इतिहास जितना गौरवशाली रहा है, वर्तमान स्थिति उतनी ही बदतर है. कभी गायों की सेवा के लिए समृद्ध मानी जाने वाली यह गोशाला आज केवल नाम की रह गई है. प्रशासनिक उदासीनता के कारण गोशाला की जमीन पर धीरे-धीरे अतिक्रमणकारियों का कब्जा बढ़ रहा है, जो स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय है.
1937 में हुई थी स्थापना
श्रीकृष्ण गोशाला का अस्तित्व 1937 में आया था. बिहार गोशाला बोर्ड के गठन के बाद 1952 में इसका आधिकारिक पंजीकरण (संख्या 52/1952) हुआ. सन 1970 तक इसकी व्यवस्था सुचारू रूप से चली, लेकिन उसके बाद स्थिति बिगड़ती गई. वर्तमान में पकड़ीदयाल एसडीओ इसके पदेन अध्यक्ष और मनीष कुमार पांडेय सचिव हैं. हाल ही में एसडीओ मंगला कुमारी ने भूमि का निरीक्षण कर व्यवस्था सुधारने की बात कही थी.
सात बीघे से अधिक जमीन, फिर भी गायें नदारद
गोशाला के पास मधुबन और फेनहारा अंचल मिलाकर कुल 7 बीघा 2 कट्ठा 16 धूर जमीन है. इतनी विशाल संपत्ति होने के बावजूद यहां आय के नियमित स्रोतों की कमी के कारण अब गायें नहीं रखी जाती हैं. समिति के सचिव के अनुसार, आय के साधनों की कमी के कारण गायों को हटाना पड़ा.
अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की मांग
पूर्व में तत्कालीन अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण हटवाया गया था, लेकिन अब फिर से खाली जमीन पर कब्जे की कोशिशें शुरू हो गई हैं. सचिव मनीष कुमार पांडेय ने बताया कि अतिक्रमणकारियों को अंचल कार्यालय के माध्यम से नोटिस जारी करवाया गया है. ग्रामीणों की मांग है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए सरकार ठोस कदम उठाए.
मोतिहारी के मधुबन से शशि चंद्र तिवारी की रिपोर्ट
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By सुनील कुमार सिंह
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