मोतिहारी: 15 घंटे तक रेलवे ट्रैक के पास पड़ा रहा युवती का शव, सीमा विवाद में उलझी रही जिला पुलिस और जीआरपी

Published by : Sarfaraz Ahmad Updated At : 05 Jun 2026 6:19 PM

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रेलवे ट्रैक के समीप घटनास्थल पर जुटे लोग और जांच करती पुलिस.

छौड़ादानो में ट्रेन से कटकर युवती की मौत के बाद उसका शव करीब 15 घंटे तक रेलवे ट्रैक के किनारे पड़ा रहा. जिला पुलिस और जीआरपी के बीच क्षेत्राधिकार को लेकर विवाद के कारण कार्रवाई में देरी हुई. पढ़ें पूरी खबर...

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मोतिहारी के छौड़ादानो से मनोज कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

Motihari News: छौड़ादानो में पुलिस व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं पर सवाल खड़ा करने वाली एक घटना सामने आई है. ट्रेन से कटकर एक युवती की मौत के बाद उसका शव करीब 15 घंटे तक रेलवे ट्रैक के किनारे पड़ा रहा. इस दौरान जिला पुलिस और राजकीय रेल पुलिस (जीआरपी) कथित रूप से क्षेत्राधिकार को लेकर जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालती रहीं. अंततः शुक्रवार सुबह शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया.

ट्रेन के सामने कूदने से हुई थी मौत

जानकारी के अनुसार बुधवार शाम करीब 5:30 बजे रक्सौल-सीतामढ़ी रेलखंड पर छौड़ादानो स्टेशन के होम सिग्नल के समीप 12545 लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस के सामने लगभग 22 वर्षीय एक युवती ने छलांग लगा दी. हादसे में उसकी मौके पर ही मौत हो गई.

ट्रेन चालक ने घटना की सूचना स्टेशन मास्टर को दी, जिसके बाद नियमानुसार मेमो तैयार कर परिचालन विभाग, जीआरपी, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और छौड़ादानो थाना को भेजा गया.

पूरी रात ट्रैक किनारे पड़ा रहा शव

सूचना के बावजूद शव को हटाने की दिशा में तत्काल कार्रवाई नहीं हुई. प्रत्यक्षदर्शियों और रेलवे सूत्रों के अनुसार स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन क्षेत्राधिकार का हवाला देते हुए शव उठाने से इनकार कर दिया. शव की सुरक्षा के लिए आरपीएफ के जवानों की तैनाती कर दी गई, लेकिन पूरी रात शव रेलवे ट्रैक के किनारे पड़ा रहा.

सुबह दोबारा भेजा गया मेमो

अगली सुबह करीब सात बजे स्टेशन मास्टर ने फिर से स्थानीय थाना और जीआरपी को मेमो भेजकर बताया कि घटना को 12 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन शव का निस्तारण नहीं हुआ है. मेमो में यह भी उल्लेख किया गया कि आरपीएफ के जवान लगातार मौके पर मौजूद हैं, जबकि जीआरपी और स्थानीय पुलिस के बीच समन्वय नहीं बन पा रहा है.

इसके बाद सुबह करीब 10 बजे जीआरपी ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा.

मानवीय संवेदनाओं पर उठे सवाल

घटना का सबसे संवेदनशील पहलू यह रहा कि भीषण गर्मी में एक अज्ञात युवती का शव पूरी रात खुले में पड़ा रहा. जानकारों का कहना है कि किसी भी अस्वाभाविक मौत के मामले में शव को जल्द सुरक्षित करना आवश्यक होता है.

लंबे समय तक शव खुले में पड़े रहने से महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहती है. ऐसे मामलों में प्राथमिकता कानूनी प्रक्रिया शुरू करने और शव को सुरक्षित रखने की होनी चाहिए.

क्या कहते हैं नियम

पुलिस और रेलवे मामलों के जानकारों के अनुसार स्टेशन यार्ड और होम सिग्नल के बीच का क्षेत्र सामान्यतः जीआरपी के अधिकार क्षेत्र में आता है. वहीं होम सिग्नल के बाहर का क्षेत्र स्थानीय थाना के अधिकार क्षेत्र में माना जाता है.

रेल पुलिस मुख्यालय द्वारा 7 दिसंबर 2015 को जारी दिशा-निर्देशों में भी स्टेशन यार्ड के बाहर चलती ट्रेन से जुड़ी घटनाओं को जिला पुलिस के अधिकार क्षेत्र में बताया गया है. ऐसे में इस मामले ने क्षेत्राधिकार को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

अधिकारियों ने क्या कहा

छौड़ादानो थानाध्यक्ष प्रभात कुमार ने कहा कि घटना स्थल जीआरपी क्षेत्र में था, इसलिए स्थानीय पुलिस ने शव नहीं उठाया. हालांकि सुरक्षा के लिए चौकीदार को मौके पर भेजा गया था. रक्सौल रेल थाना के थानाध्यक्ष संजीव कुमार ने कहा कि होम सिग्नल के बाद का क्षेत्र स्थानीय थाना के अधिकार क्षेत्र में आता है. स्थानीय पुलिस का सहयोग नहीं मिलने के बावजूद जीआरपी ने बाद में शव हटाकर पोस्टमार्टम कराया.

रक्सौल एसडीपीओ मनीष आनंद ने कहा कि यह सीमा विवाद का मामला नहीं बल्कि कार्रवाई में देरी का मामला है. इस संबंध में जवाब जीआरपी को देना चाहिए. वहीं रेल डीएसपी राजेश कुमार से संपर्क किए जाने पर उन्होंने बाद में जानकारी देने की बात कही, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका.

स्टेशन अधीक्षक राजेश कुमार दास ने बताया कि घटना के तुरंत बाद संबंधित विभागों को मेमो भेज दिया गया था. इसके बावजूद कार्रवाई में देरी हुई. सुबह दोबारा मेमो भेजने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची.

मानवता से जुड़ा बड़ा सवाल

यह मामला केवल अधिकार क्षेत्र के विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि संवेदनशीलता और मानवीय जिम्मेदारी से भी जुड़ा हुआ है. एक युवती की मौत के बाद उसका शव 15 घंटे तक खुले में पड़ा रहा और जिम्मेदार एजेंसियां क्षेत्राधिकार तय करने में उलझी रहीं.

ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या नियमों की व्याख्या मानवता और संवेदनशीलता से बड़ी हो गई है.

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लेखक के बारे में

By Sarfaraz Ahmad

सरफराज अहमद IIMC से प्रशिक्षित पत्रकार हैं. राजनीति, समाज और हाइपरलोकल मुद्दों पर लिखते हैं. क्रिकेट और सिनेमा में गहरी रुचि रखते हैं. बीते तीन वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत हैं।

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