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Motihari:ऑनलाइन फर्जी सीबीआई व सुप्रीम कोर्ट की होती थी हियरिंग

Updated at : 14 Jun 2025 9:57 PM (IST)
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Motihari:ऑनलाइन फर्जी सीबीआई व सुप्रीम कोर्ट की होती थी हियरिंग

शहर के बलुआ टाला मानसपुरी मोहल्ला के रहने वाले रिटायर्ड कृषि कर्मी दिलीप कुमार व उनकी पत्नी गीता अग्रवाल करीब दस दिनों तक दहशत के साये में रहे.

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Motihari: मोतिहारी. शहर के बलुआ टाला मानसपुरी मोहल्ला के रहने वाले रिटायर्ड कृषि कर्मी दिलीप कुमार व उनकी पत्नी गीता अग्रवाल करीब दस दिनों तक दहशत के साये में रहे. साइबर अपराधियों ने उनके साथ डिजिटल आरेस्ट का जो खेल खेला, उसे सुन कर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जायेंगे. दंपत्ति का मोबाइल हैक कर लिया. रात के 12-एक बजे तक उनको वीडियो कॉल पर रख हरेक गतिविधि की जानकारी ली जाती थी. वह जब भी घर से बाहर निकलने की कोशिश करते थे तो वीडियो कॉल कर उनको गोली मारने की धमकी दी जाती थी. दिलीप कुमार ने डिजिटल आरेस्ट की पूरी कहानी बतायी. उन्होंने बताया कि ऑनलाइन फर्जी सीबीआई व सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई होती थी. वीडियो कॉल कर उनसे पूछताछ की जाती थी. वीडियो कॉल में साफ दिखता था कि सामने जज बैठे हुए हैं. वकील बहस करते थे. उनसे भी सवाल पूछा जाता था. उन्हें बताया जाता था कि मनी लॉन्ड्रिंग केस में आपके खिलाफ ठोस साक्ष्य है. उसके बाद कहा जाता था कि जेल जाने से बचना है तो कोर्ट द्वारा जितना चार्च लगाया गया है, उसके बताये गये बैंक अकाउंट में जमा कर दे. उन्हें अलग-अलग कई बैंकों के अकाउंट भी दिये गये,जिसमे आरटीजीएस करने का आदेश फर्जी सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिया गया. दिलीप आगे बताये हैं कि जब-जब ऑनलाइन फर्जी कोर्ट बैठा, तब-तब आरटीजीएस करने का आदेश मिला. उसके अगले दिन बैंक में जाकर बताये गये अकाउंट में पैसा जमा करा वापस चला आता था. नकली सुप्रीम कोर्ट व सीबीआई बन कर ””””डिजिटल अरेस्ट””””और साइबर धोखाधड़ी का खेल उनके साथ खेला गया. उन्होंने बताया कि दस दिनों में करीब 56 लाख रुपये उनके द्वारा बताये गये बैंक अकाउंट में आरटीजीएस किया था.उन्होंने यह भी बताया कि उनके घर के बाहर दो अंजाम लोग पहरेदारी में रहते थे. कभी सिविल ड्रेस तो कभी वर्दी में दिखते थे. जब उन्हें महसूस हुआ कि उनको ठगा गया है तो उन्होंने साइबर थाना पहुंच प्राथमिकी दर्ज करायी. दिलीप ने बताया कि साइबर थाना की पुलिस ने उनकी पूरी मदद की है. दस जनवरी को दिलीप के पास आया था पहला कॉल दिलीप ने बताया कि उनके पास दस जनवरी को पहला कॉल आया था. कॉल करने वाले ने सीबीआई अधिकारी बता कर कहा कि आपका नाम नरेश गोयल मनी लॉन्ड्रिंग केस में आया है. आपके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से वारंट जारी है. उसके बाद दस दिनों तक उन्हें हाउस आरेस्ट कर रखा गया. फर्जी कोर्ट लगाकर हियरिंग होती थी. हियरिंग में पैसा आरटीजीएस करने का आदेश मिलता था. एक आरोपी गिरफ्तार, अन्य की खोज में छापेमारी साइबर थाना के डीएसपी अभिनव पराशर ने बताया कि मामले में एक आरोपी कटिहार तेजा टोला का आकाश मुखर्जी पकड़ा जा चुका है. उसके बैंक अकाउंट में दिलीप कुमार से ठगी का दो लाख कैश आरटीजीएस हुआ है. उसमें करीब 80 हजार रुपये पर होल्ड लगाया गया है. इस साइबर गिरोह का मास्टर माइंड बंगाल का रहने वाला बीटेक का एक छात्र है. उसकी गिरफ्तारी को लेकर पुलिस टीम बंगाल जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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