रोजगार से खेल तक! मनरेगा से बिहार में 4807 स्पोर्ट्स ग्राउंड, रनिंग ट्रैक और वालीबॉल कोर्ट

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Bihar News: मनरेगा ने बिहार के गांवों की तस्वीर बदल दी है. रोजगार के साथ स्पोर्ट्स कल्चर को बढ़ावा मिला है. दो सालों में 4807 खेल मैदान बने हैं, जहां गांव के युवा फिटनेस, अनुशासन और खेल प्रतिभा निखार रहे हैं. ये मैदान अब गांवों में स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और उज्ज्वल भविष्य की नई पहचान बन चुके हैं.
Bihar MNREGA News: बिहार के गांवों में अब हालात बदल रहे हैं. पहले जहां गांवों की पहचान सिर्फ खेती और मजदूरी से होती थी, वहीं अब खेल-कूद की रौनक भी दिखाई देने लगी है. दौड़ते हुए युवा, तालियों की गूंज और जीत का उत्साह अब गांवों का हिस्सा बन गया है.
स्पोर्ट्स कल्चर को मिल रहा बढ़ावा
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ने रोजगार देने के साथ-साथ गांवों में स्पोर्ट्स कल्चर को भी बढ़ावा दिया है. इस योजना के तहत बिहार में बड़ी संख्या में खेल मैदान बनाए गए हैं. बीते दो सालों में बिहार में 4807 खेल मैदान तैयार हो चुके हैं, जो कि चिन्हित 4716 ग्राम पंचायतों से भी ज्यादा हैं. यानी कई पंचायतों में एक से अधिक खेल मैदान बनाए गए हैं.
तय हुआ 522 करोड़ का बजट
ग्रामीण विकास विभाग ने साल 2024 में राज्य की 8053 ग्राम पंचायतों में से 4716 पंचायतों को इस योजना में शामिल किया. इन पंचायतों में 5341 खेल मैदान बनाने का लक्ष्य रखा गया, जिसके लिए करीब 522 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया. दिसंबर के अंत तक लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है.
युवाओं को मिला फायदा
इन खेल मैदानों से गांवों के युवाओं को बहुत फायदा हो रहा है. पहले अभ्यास के लिए उन्हें शहर जाना पड़ता था, अब गांव में ही खेलने की अच्छी सुविधा मिल रही है. इससे युवाओं में खेल के प्रति रुचि बढ़ी है, साथ ही स्वास्थ्य, अनुशासन और नशामुक्ति को भी बढ़ावा मिला है.
मानरेगा के अधिकारी ने क्या कहा ?
मनरेगा के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी जावेद अली खां के अनुसार, खेल मैदानों को तीन तरह से विकसित किया जा रहा है
- छोटे मैदान (1 एकड़ तक)
- मध्यम मैदान (1 से 5 एकड़ तक)
- बड़े खेल परिसर (4 एकड़ से अधिक)
इन मैदानों में नियमित खेल प्रतियोगिताएं हो रही हैं, जिससे गांवों में आपसी सहयोग और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है. एक खेल मैदान बनाने में औसतन 10 से 17 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं. फिलहाल 534 अधूरे खेल मैदानों को जल्द पूरा करने का काम चल रहा है.
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इन खेल मैदानों में कई सुविधाएं दी जा रही हैं
- रनिंग ट्रैक
- वॉलीबॉल और बैडमिंटन कोर्ट
- क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी और खो-खो के लिए मैदान
- बास्केटबॉल कोर्ट
- स्टोर रूम और चारदीवारी
ग्रामीण विकास मंत्री ने क्या कहा ?
ग्रामीण विकास और परिवहन मंत्री श्रवण कुमार का कहना है कि मनरेगा से बने ये खेल मैदान गांवों में बड़ा बदलाव ला रहे हैं. इससे युवाओं को सेना और अन्य भर्तियों की तैयारी में मदद मिल रही है. साथ ही रोजगार सृजन, पंचायत की जमीन का सही उपयोग और परती भूमि का संरक्षण भी हो रहा है. आज मनरेगा से बने ये खेल मैदान गांवों में सिर्फ खेल का केंद्र नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की पहचान बनते जा रहे हैं.
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लेखक के बारे में
By Nishant Kumar
Nishant Kumar: निशांत कुमार पिछले तीन सालों से डिजिटल पत्रकारिता कर रहे हैं. दैनिक भास्कर के बाद राजस्थान पत्रिका के डिजिटल टीम का हिस्सा रहें. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के नेशनल-इंटेरनेशनल और स्पोर्ट्स टीम में काम कर रहे हैं. किस्सागोई हैं और देश-विदेश की कहानियों पर नजर रखते हैं. साहित्य पढ़ने-लिखने में रुचि है.
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