बाबा बैद्यनाथ का तिलकोत्सव करने सुलतानगंज से देवघर के लिए रवाना हुए मिथिलांचल के कांवरिया, जानें पौराणिक महत्व

धर्म के जानकार बताते हैं कि भगवान राम ने पहली बार माघ मास के अमावस्या में सुलतानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा जल लेकर पैदल बाबा पर जलार्पण किया था. यह परंपरा अभी भी चल रही है.
भागलपुर (सुलतानगंज): मौनी अमावस्या को गंगा जल लेकर कांवरिया पैदल बाबाधाम रवाना हुए.बसंत पंचमी के दिन बाबा का तिलक होगा. मधुबनी जिले के मोहन मिश्र बताते है कि मिथिलांचल की परंपरा में शिव और शक्ति का विशेष महत्व है.
धर्म के जानकार बताते हैं कि भगवान राम ने पहली बार माघ मास के अमावस्या में सुलतानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा जल लेकर पैदल बाबा पर जलार्पण किया था. यह परंपरा अभी भी चल रही है. मौनी अमावस्या में गंगा जल लेकर देवघर जाने की परंपरा मिथिलांचल से जुड़ी है. हर घर से एक व्यक्ति अवश्य ही कांवरिया बन कर सुलतानगंज से देवघर जाते हैं. माघ माह में बाबा की पूजा करने से बाबा सारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

द्वादश ज्योर्तिलिंग बाबा बैद्यनाथ के शादी के पूर्व तिलक का रस्म वर्षों पुराना है. ऐसा माना जाता है कि मैया पार्वती मिथिलांचल की बेटी थी. परंपरा के अनुसार बाबा का तिलक अजगैबीनगरी के पवित्र उतरवाहिनी गंगा जल चढाने के बाद मिथिलांचल के ही लोग करते हैं.

मौनी अमावस्या पर शनिवार को पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा तट पर कांवरियों का महासैलाब उमड़ पड़ा. लगभग तीन लाख कांवरिया गंगा जल भर कर बाबाधाम रवाना हुए. बसंत पंचमी शनिवार को सभी कांवरिया बाबा बैद्यनाथ का तिलकोत्सव कर अपने घर लौटेंगे.

मिथिलांचल सहित नेपाल, छत्तीसगढ़, बंगाल, बिहार, झारखंड आदि राज्यों के कांवरियों की भीड़ काफी संख्या में देखी गयी. मौनी अमावस्या पर को लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा अजगैवीनाथ की पूजा अर्चना किया.
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