भारी बारिश से बिहार में आम की कीमत धड़ाम, किसानों को पांच अरब के नुकसान का अनुमान

Published at :29 Jun 2021 9:11 AM (IST)
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भारी बारिश से बिहार में आम की कीमत धड़ाम, किसानों को पांच अरब के नुकसान का अनुमान

‘बारिश ने आम की कीमत को आधा कर दिया है़ 150 रुपये प्रति किलो बिकने वाला जर्दालु मुश्किल से 50 रुपये प्रति किलो के भाव में बिक रहा है़ मालदह की कीमत भी तीस रुपये प्रति किलो गिरी है ’ यह पीड़ा भागलपुर निवासी कृष्णानंद सिंह की अकेले नहीं है़ बिहार के आम उत्पादक किसानों को अत्यधिक बारिश से भारी नुकसान पहुंचाया है़

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पटना. ‘बारिश ने आम की कीमत को आधा कर दिया है़ 150 रुपये प्रति किलो बिकने वाला जर्दालु मुश्किल से 50 रुपये प्रति किलो के भाव में बिक रहा है़ मालदह की कीमत भी तीस रुपये प्रति किलो गिरी है ’ यह पीड़ा भागलपुर निवासी कृष्णानंद सिंह की अकेले नहीं है़ बिहार के आम उत्पादक किसानों को अत्यधिक बारिश से भारी नुकसान पहुंचाया है़

आम की खेती करने वाले किसानों को बारिश के कारण एक अनुमान के मुताबिक करीब पांच अरब रुपये का नुकसान पहुंचा है़ बिहार में 149 हेक्टेयर में आम की खेती हो रही है़ देश में सबसे अधिक आम पैदा करने वाले पांच राज्यों में बिहार का भी शामिल है़ प्रति वर्ष करीब 14.5 लाख टन आम की पैदावार है़ जर्दालु, मालदह, हेमसागर, दशहरी, कृष्णभोग, भरतभोग आदि के बगीचों में आम मैच्योर कर रहा है़

आम उत्पादन में राज्यवार हिस्सेदारी

  • उत्तर प्रदेश 23%

  • आंध्र प्रदेश 15%

  • कर्नाटक 9.5%

  • तेलंगाना 9%

  • बिहार 7%

149 हेक्टेयर में बिहार में आम की खेती हो रही है. आम के छिलके पर काला धब्बा पड़ने से एक किलो पर बीस से तीस रुपये तक कम मिल रहे किसानों को .

आम उत्पादक परेशान

आम पर धब्बा हल्का और गहरा होने पर भाव में यह अंतर कम और अधिक होता रहता है़ पटना निवासी आम उत्पादक किसान मुकेश कुमार भी रमेश की बात से सहमति प्रकट करते है़ं भागलपुर के आम उत्पादक किसानों का कहना है कि बारिश से आम में काला धब्बा अर्थात फफूंद का प्रकोप हो गया़

आम की कीमत 50 फीसदी कम हो गयी. जर्दालु 150 रुपये किलो तक बिके थे, जो बाद में 50 रुपये पर बिके़ मालदह पहले 80 रुपये तक बिका अभी 30 रुपये बिक रहा है़ मुजफ्फरपुर में मालदह 25 से 30 रुपये, तो हिमसागर की कीमत किसानों को 20 से 25 रुपये प्रति किलो ही मिल रही है़

कीड़ों का प्रकोप भी पहुंचा रहा नुकसान

डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के प्रोफेसर सह निदेशक अनुसंधान डॉ एसके सिंह और बिहार कृषि विश्वविद्यालय के उद्यान विभाग के अध्यक्ष डाॅ संजय सहाय बारिश से कीट के प्रकोप बढ़ने की आशंका जता रहे है़ फल विज्ञानियों का कहना है कि वातावरण में नमी से बीमी फल मक्खी आम को भारी नुकसान पहुंचा रही है़ ये आम के फल पर जून से अगस्त तक आक्रमण करती है. इस कारण आम का फल खराब हो जाता है.

Posted by Ashish Jha

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