पांच अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट बंद, फिर भी मॉकड्रिल का आदेश, व्यवस्था पर उठे सवाल

सदर अस्पताल स्थित बंद आक्सीजन जेनरेशन प्लांट
मधुबनी के सरकारी अस्पतालों में लगे ऑक्सीजन प्लांट वर्षों से बंद पड़े हैं, ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने मॉकड्रिल का आदेश जारी किया है. टेक्नीशियन और कर्मचारियों की कमी के चलते इस प्रक्रिया के कागजी होने की आशंका जताई जा रही है.
Madhubani News: जिले के सरकारी अस्पतालों में कोरोना काल के दौरान लगाए गए पीएसए (ऑक्सीजन जेनरेशन) प्लांट वर्षों से बंद पड़े हैं. इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के कार्यपालक निदेशक (ईडी) ने 13 से 16 जुलाई तक नौवें चरण की मॉकड्रिल कराने का निर्देश जारी किया है. टेक्नीशियन और संचालन कर्मियों के अभाव में यह मॉकड्रिल भी पहले की तरह केवल कागजी प्रक्रिया बनकर रह जाने की आशंका जताई जा रही है.
जिले के पांच स्वास्थ्य संस्थानों में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित हैं, लेकिन सदर अस्पताल को छोड़कर किसी भी संस्थान में टेक्नीशियन की नियुक्ति नहीं की गई. सदर अस्पताल में तैनात टेक्नीशियन को भी मार्च 2025 में कार्यमुक्त कर दिया गया था. इसके बाद से वहां का प्लांट भी तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ा है.
13 से 16 जुलाई तक होगी मॉकड्रिल
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देश के आलोक में ईडी अमित कुमार पांडेय ने सभी सरकारी अस्पतालों में लगे पीएसए ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट का नौवां मॉकड्रिल 13 से 16 जुलाई के बीच सुबह 9 बजे से कराने का निर्देश दिया है.
निर्देश के अनुसार मॉकड्रिल के दौरान प्लांट की ऑक्सीजन शुद्धता और कार्यक्षमता की जांच कर रिपोर्ट गूगल फॉर्म पर अपलोड की जाएगी. इसकी निगरानी के लिए सभी क्षेत्रीय अपर निदेशक और सिविल सर्जनों को निर्देशित किया गया है.
कोरोना काल में लगे थे पांच ऑक्सीजन प्लांट
वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के दौरान सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल जयनगर, फुलपरास, झंझारपुर तथा अररिया संग्राम ट्रॉमा सेंटर में पीएसए ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे. इनका उद्देश्य अस्पतालों को ऑक्सीजन के मामले में आत्मनिर्भर बनाना था, लेकिन टेक्नीशियन की कमी के कारण अधिकांश प्लांट नियमित रूप से संचालित ही नहीं हो सके.
आज भी सिलेंडर पर निर्भर हैं अस्पताल
ऑक्सीजन प्लांट बंद रहने के कारण अस्पतालों में भर्ती मरीजों और एसएनसीयू में भर्ती नवजात शिशुओं को आज भी जंबो सिलेंडरों से ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जा रही है. इसके लिए अस्पताल प्रबंधन को हर महीने एक लाख रुपये से अधिक का भुगतान संबंधित एजेंसी को करना पड़ता है.
सिविल सर्जन बोले- स्थानीय स्तर पर करेंगे व्यवस्था
सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि जब प्लांट ही चालू नहीं हैं तो मॉकड्रिल कैसे होगी. उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर टेक्नीशियन की व्यवस्था कर मॉकड्रिल कराने का प्रयास किया जाएगा.
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