Madhubani News: पंडित कुंजबिहारी मिश्र ने किया गोवर्धन पूजा और कृष्ण बाल-लीला का अद्भुत वर्णन, उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
Published by : Purushottam Kumar Updated At : 30 May 2026 6:04 PM
कथावाचन करते पंडित कुंजबिहारी मिश्र
Madhubani News: मधुबनी के बरैयाटोल में पंडित कुंजबिहारी मिश्र के आवास पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन. गोवर्धन लीला और कालिया नाग मर्दन प्रसंग पर झूमे श्रद्धालु. रविवार को होगा समापन. जानिए खबर विस्तार से…
Madhubani News: मधुबनी नगर क्षेत्र के बरैयाटोल में इन दिनों अध्यात्म और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है. स्थानीय निवासी सह प्रख्यात कथावाचक पंडित कुंजबिहारी मिश्र के आवास पर आयोजित सात दिवसीय भव्य श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ से पूरे इलाके का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया है. प्रतिदिन शाम को ढलते ही यहाँ संगीत की मधुर धुनों के बीच भागवत महापुराण की अमृत वर्षा हो रही है, जिससे संपूर्ण क्षेत्र में भक्तिरस की अविरल धारा बह रही है. संगीतमय प्रवचन को सुनने और भगवान के दिव्य चरित्रों का रसपान करने के लिए हर दिन शाम 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक कथा पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है.
कन्हैया ने तोड़ा देवराज इंद्र का अहंकार
कथा के विशेष प्रसंग की व्याख्या करते हुए मुख्य कथावाचक पंडित कुंजबिहारी मिश्र ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल्य रूप की अनुपम लीलाओं और गोवर्धन पूजा के अलौकिक इतिहास का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया. उन्होंने कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब नंदगांव में ब्रजवासी और बाबा नंद देवराज इंद्र के पूजन की व्यापक तैयारियां कर रहे थे, तब नन्हे कन्हैया ने उन्हें पारंपरिक व्यवस्था को बदलने को कहा. कृष्ण ने तर्क दिया कि जो पर्वत और प्रकृति हमें चारा, जल और जीवन देते हैं, हमें उनकी पूजा करनी चाहिए. कन्हैया के कहने पर सभी ब्रजवासियों ने इंद्र के बजाय गोवर्धन पर्वत की भव्य पूजा शुरू कर दी.
इस बदलाव से देवराज इंद्र अत्यंत कुपित (क्रोधित) हो गए और उन्होंने ब्रजमंडल को नष्ट करने के उद्देश्य से वहां मूसलाधार बारिश और भयंकर आंधी-तूफान का तांडव शुरू कर दिया. ब्रजवासियों को संकट में देख सर्वशक्तिमान भगवान कृष्ण ने अपनी कनिष्ठिका (छोटी) उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत को एक छत्र की तरह उठा लिया. इसके बाद सभी नंदवासियों और पशु-पक्षियों ने पर्वत के नीचे सुरक्षित आश्रय लिया, जिससे इंद्र का अहंकार पूरी तरह चूर हो गया.
वृंदावन जाने वाले श्रद्धालु जरूर करें गोवर्धन की परिक्रमा
पंडित कुंजबिहारी मिश्र ने गोवर्धन भगवान की असीम महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन धर्म में इस पावन पर्वत का आध्यात्मिक महत्व सर्वोपरि है. उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि जो कोई भी भक्त भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन की अभिलाषा लेकर पावन नगरी वृंदावन जाते हैं, उन्हें गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए, क्योंकि इसके बिना ब्रज यात्रा अधूरी मानी जाती है.
इससे पहले कथा व्यास ने माता यशोदा द्वारा कन्हैया के बाल्य स्वरूप को ऊखल से बांधने की लीला, कंस द्वारा भेजे गए क्रूर राक्षस बकासुर का वध तथा सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा के मन में श्रीकृष्ण के परब्रह्म होने को लेकर उपजे संशय और उसके निवारण के प्रसंग का भव्य व सजीव चित्रण किया. इसके बाद कथा के क्रम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने यमुना नदी के ‘कालीदह’ में कालिया नाग के मर्दन और उसे नाथने की कथा सुनाकर पंडाल में उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.
भव्य आरती और प्रसाद वितरण के साथ रविवार को होगा महायज्ञ का समापन
संगीतमय कथा के बीच-बीच में कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए भजनों और सोहर गीतों पर श्रद्धालु खुद को झूमने से नहीं रोक पाए, जिससे पूरा वातावरण दिव्य और रमणीय हो उठा. हर दिन की तरह कथा के अंत में यजमानों और मुख्य पुरोहितों द्वारा श्रीमद्भागवत भगवान की भव्य महाआरती उतारी गई. इसके उपरांत उपस्थित भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया, जिसे ग्रहण कर श्रद्धालुओं ने पुण्य लाभ कमाया. आचार्य ने बताया कि इस सात दिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान का भव्य समापन रविवार को पूर्णाहूति, महाप्रसाद भंडारा और विसर्जन के साथ किया जाएगा.
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