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नाबालिग से दुष्कर्म मामले में एक को 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा

Updated at : 29 Apr 2024 10:00 PM (IST)
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नाबालिग से दुष्कर्म मामले में एक को 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा

अपर जिला एवं सत्र न्यायालय सप्तम सह विशेष न्यायालय पॉक्सो के न्यायाधीश दिवेश कुमार की न्यायालय में सोमवार को हरलाखी थाना क्षेत्र में 14 वर्षीय नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म करने के मामले की सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई.

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मधुबनी. अपर जिला एवं सत्र न्यायालय सप्तम सह विशेष न्यायालय पॉक्सो के न्यायाधीश दिवेश कुमार की न्यायालय में सोमवार को हरलाखी थाना क्षेत्र में 14 वर्षीय नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म करने के मामले की सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई. न्यायालय ने दोनों पक्ष की दलील सुनने के बाद आरोपी हरलाखी थाना क्षेत्र के नहरनियां निवासी मो. बबलू को पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत दस साल सश्रम कारावास की सजा सुनायी है. साथ ही न्यायालय ने आरोपी पर 15 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है. जुर्माने कि राशि नहीं देने पर आरोपी को छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. साथ ही न्यायालय ने आरोपी पर लगे अन्य दफा 363 भादवि में भी तीन साल सश्रम कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया है. सभी सजाएं साथ-साथ चलेगी. न्यायालय में सरकार की ओर से बहस करते हुए विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो कुमारी मधुरानी ने आरोपी द्वारा किए गये अपराध को गंभीर बताते हुए कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की थी. वहीं बचाव पक्ष से लीगल एंड डिफेंस काउंसिल चीफ रंजीत कुमार झा ने बहस करते हुए कम से कम सजा की मांग की थी. क्या है मामला विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो के अनुसार घटना 28 सितंबर 2022 की है. जब आवेदक सुबह में सो कर उठे तो अपने 14 वर्षीय नाबालिग पोती को घर में नहीं देखा. तत्काल उसकी खोजबीन की जाने लगी. इसी दौरान सूचक को जानकारी मिली कि आरोपी अन्य लोगों के साथ मिलकर शादी करने की नीयत से नाबालिग का अपहरण कर लिया है. मामले को लेकर पीड़िता के दादा ने हरलाखी थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. मोबाइल लोकेशन से बरामद हुई थी पीड़िता मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अनुसंधान के दौरान मोबाइल लोकेशन के आधार अनुसंधानकर्ता ने पीड़िता को हरियाणा के गुरूग्राम के एक कमरे से बरामद किया था. वहीं फैक्ट्री में कार्य रहे आरोपी को गिरफ्तार किया था. चार लाख क्षतिपूर्ति देने का आदेश विशेष लोक अभियोजक के अनुसार न्यायालय ने पीड़िता की मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार को चार लाख रुपये देने का आदेश दिया है. वहीं आरोपी के जुर्माना देने के स्थिति में जुर्माने कि राशि भी पीड़िता को देने का आदेश दिया गया है.

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