मधुबनी: जानलेवा हमले के मामले में पूर्व मुखिया को 10 वर्ष की सजा

सिविल कोर्ट मधुबनी | Prabhat Khabar Network
मधुबनी: सकरी थाना क्षेत्र में 2018 में हुए जानलेवा हमले के मामले में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने बुधवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने पूर्व मुखिया अली अहमद उर्फ मुन्ना बॉस को दोषी पाते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
Madhubani News: सकरी थाना क्षेत्र में वर्ष 2018 में हुए जानलेवा हमले के मामले में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पवन कुमार पांडेय की अदालत ने बुधवार को सजा के बिंदु पर फैसला सुनाया. अदालत ने सकरी थाना क्षेत्र के सिवोतर टोला निवासी पूर्व मुखिया अली अहमद उर्फ मुन्ना बॉस को भारतीय न्याय संहिता लागू होने से पूर्व के प्रकरण में भारतीय दंड संहिता (भादवि) की धारा 307 के तहत दोषी पाते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. जुर्माना नहीं देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.
अन्य धाराओं में भी सुनाई गई सजा
अदालत ने आरोपी को भादवि की धारा 341 में एक माह, धारा 325 में पांच वर्ष के कारावास एवं पांच हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 504 में दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 27 में तीन वर्ष के कारावास एवं पांच हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 30 में छह माह के कारावास एवं दो हजार रुपये जुर्माने से भी दंडित किया. अदालत ने सभी सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश दिया.
लोक अभियोजक ने मांगी थी कठोर सजा
सरकार की ओर से लोक अभियोजक शिव शंकर प्रसाद राय ने अदालत में बहस करते हुए आरोपी को अधिकतम सजा देने की मांग की थी. वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता शिव कुमार ठाकुर ने कम सजा देने का आग्रह किया.
अपहरण के प्रयास के दौरान चली थी गोली
अभियोजन के अनुसार 17 सितंबर 2018 की दोपहर सूचक उमर महमूद को सूचना मिली कि उनके पुत्र का कथित रूप से अपहरण किया जा रहा है. आरोप है कि जब वह मौके पर पहुंचे तो आरोपी अली अहमद उर्फ मुन्ना बॉस अपने सहयोगियों के साथ उनके पुत्र को वाहन में बैठा रहा था. इसी दौरान सूचक के वहां पहुंचने पर आरोपी ने कथित रूप से पिस्टल से गोली चला दी, जो उनके बांह में लगी. गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग पहुंचे, जिसके बाद आरोपी और अन्य लोग मौके से फरार हो गए. इस मामले में सकरी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी.
सात गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला
लोक अभियोजक के अनुसार घटना के संबंध में 17 सितंबर 2018 को सकरी थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई थी. अनुसंधान के बाद करीब दो माह में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया. जनवरी 2022 में अदालत ने आरोप तय किए. विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाहों की गवाही कराई गई, जिसके आधार पर अदालत ने फैसला सुनाया.
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