Madhubani News : धूल, धुआं और स्क्रीन का बढ़ा प्रभाव, युवाओं में तेजी से बढ़ रहे आंखों के रोग
Published by : GAJENDRA KUMAR Updated At : 15 Jan 2026 9:57 PM
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वायु प्रदूषण और बदलती जीवनशैली मधुबनी जिले के लोगों की आंखों की रोशनी पर भारी पड़ रही है.
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Madhubani News : मधुबनी.
वायु प्रदूषण और बदलती जीवनशैली मधुबनी जिले के लोगों की आंखों की रोशनी पर भारी पड़ रही है. सदर अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक साल में आंखों की बीमारी से जूझ रहे मरीजों की संख्या दोगुनी हो गयी है, जहां पहले ओपीडी में प्रतिदिन 15 से 20 मरीज आते थे, वहीं अब यह संख्या 45 के पार पहुंच गई है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें बड़ी संख्या युवाओं की है.डिजिटल स्क्रीन और प्रदूषण मुख्य कारण
नेत्र विशेषज्ञ डॉ. आकांक्षा के अनुसार, धूल और धुएं के बढ़ते स्तर के साथ-साथ मोबाइल और लैपटॉप का अत्यधिक उपयोग इस समस्या की मुख्य जड़ है. युवा घंटों स्क्रीन के सामने बिता रहे हैं, जिससे उनकी आंखों पर दबाव बढ़ रहा है. इसके अलावा, शारीरिक श्रम की कमी, खेलकूद से दूरी और खान-पान में लापरवाही (जैसे फल, दूध और हरी सब्जियों का कम सेवन) दृष्टि दोष का कारण बन रही है. डॉ. आकांक्षा ने बताया कि अब हर दिन 10 से 15 युवा कम दृष्टि की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं.गंभीर बीमारियों का बढ़ रहा खतरा :
सदर अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आशिक रेजा ने चेतावनी दी कि धूल और धुएं के कारण आंखों में जलन, खुजली, पानी आना और लाली जैसी समस्याएं आम हो गयी हैं. कई मरीज ग्लूकोमा, डायबिटिक रेटिनोपैथी और मोतियाबिंद जैसी गंभीर स्थितियों से भी पीड़ित मिल रहे हैं. इन बीमारियों के कारण मरीजों को गाड़ी चलाने, चेहरा पहचानने और टीवी देखने में काफी कठिनाई हो रही है.विशेषज्ञों की सलाह :
डॉक्टरों ने सलाह दी है कि 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को साल में कम से कम दो बार आंखों की जांच करानी चाहिए. साथ ही, डिजिटल उपकरणों का सीमित उपयोग और संतुलित आहार लेना अनिवार्य है. गौरतलब है कि सदर अस्पताल में ओपीडी के माध्यम से मरीजों को निशुल्क चिकित्सकीय परामर्श के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुफ्त चश्मा भी उपलब्ध कराया जा रहा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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