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राजा परीक्षित की कथा सुन भाव विभोर से श्रद्धालु

कथावाचक पंडित गुणानंद चौधरी ने मैथिली भाषा में राजा परीक्षित संवाद, शुकदेव जन्म, अमर कथा सहित अन्य प्रसंग का वाचन किया.

खजौली . प्रखंड के बड़की ठाहर स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में ग्रामीणों के सहयोग से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक पंडित गुणानंद चौधरी ने मैथिली भाषा में राजा परीक्षित संवाद, शुकदेव जन्म, अमर कथा सहित अन्य प्रसंग का वाचन किया. कथावाचक ने शुकदेव परीक्षित संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि एक बार परीक्षित महाराज वन में चले गए. उनको प्यास लगी तो समीक ऋषि से पानी मांगा. ऋषि समाधि में थे, इसलिए पानी नहीं पिला सके. परीक्षित ने सोचा कि साधु ने अपमान किया है. उन्होंने मरा हुआ सांप उठाया और समीक ऋषि के गले में डाल दिया. यह सूचना पास में खेल रहे बच्चों ने समीक ऋषि के पुत्र को दी. ऋषि के पुत्र ने शाप दिया कि आज से सातवें दिन तक्षक नामक सर्प आएगा और राजा को जलाकर भस्म कर देगा. समीक ऋषि को जब यह पता चला तो उन्होंने दिव्य दृष्टि से देखा कि यह तो महान धर्मात्मा राजा परीक्षित हैं और यह अपराध इन्होंने कलियुग के वशीभूत होकर किया है. समीक ऋषि ने जब यह सूचना जाकर परीक्षित महाराज को दी तो वह अपना राज्य अपने पुत्र जन्मेजय को सौंपकर गंगा नदी के तट पर पहुंचे. वहां बड़े ऋषि, मुनि देवता आ पहुंचे और अंत में व्यास नंदन शुकदेव वहां पहुंचे. शुकदेव को देखकर सभी ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। कथा सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए. कथा के दौरान धार्मिक गीतों पर श्रद्धालु झूमते रहे. कथा में दूसरे दिन बड़ी संख्या में महिला-पुरुष कथा सुनने पहुंचे. कथा में पुजारी उग्रनाथ मिश्र, प्रभानंद झा, प्रमोद झा, अरुण ठाकुर, जितेंद्र ठाकुर, कल्याण झा, बिरू झा, भवानी सिंह, सुरेंद्र सिंह, पंकज ठाकुर, गणेश यादव, अजय झा, राम झा, भरत झा, भरत सिंह सहित समस्त ग्रामवासी मौजूद थे.

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