दो वर्ष से अधिक उम्र के शिशु को थैलेसीमिया का खतरा

थैलेसीमिया एक रक्त जनित रोग है, जो मानव शरीर में हीमोग्लोबिन के उत्पादन को कम करता है. चिकित्सकों की माने तो हीमोग्लोबिन द्वारा ही पूरे शरीर की कोशिकाओं में ऑक्सीजन को पहुंचाने का काम होता है.
शरीर एवं आंखों का पीलापन, पीलिया से ग्रसित होना, स्वभाव में चिड़चिड़ापन, भूख नहीं लगना,
थकावट एवं कमजोरी महसूस होना,
बार-बार बीमार होना, सर्दी, जुकाम बने रहना, कमजोरी और उदासी रहना, आयु के अनुसार शारीरिक विकास नहीं होना एवं सांस लेने में तकलीफ होना शामिल है
कैसे करें थैलेसीमिया से बचाव
विवाह से पहले महिला-पुरुष की रक्त की जांच कराएं
गर्भावस्था के दौरान इसकी जांच कराएं
मरीज का हीमोग्लोबिन 11 या 12 बनाए रखने की कोशिश करें
समय पर दवा लेने के साथ ही पूरा इलाज पूरा लें
सिविल सर्जन ने कहा कि किसी भी दंपति को शिशु के जन्म के बारे में सोचने के समय रक्त जांच अवश्य करवानी चाहिए. इससे प्रसव के समय किसी भी तरह की जटिलता से बचा जा सकता है. एनीमिया के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सीय परामर्श लेना चाहिए, इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि गर्भवती स्त्री में मधुमेह के लक्षण हो तो उसे और सतर्कता बरतनी चाहिए व नियमित जांच करानी चाहिए.
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By Prabhat Khabar News Desk
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