पीसीवी वैक्सीन से रुकेगा निमोनिया
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :19 May 2017 1:09 AM
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कार्यशाला. टीकाकरण में शामिल होगी वैक्सीन मधुबनी : निमोनिया पांच वर्ष से कम उम्र बच्चों के मृत्यु का प्रमुख कारण है. वर्ष 2015 के अनुमान के अनुसार भारत में 1000 नवजात शिशुओं में 7 नवजात शिशु की मृत्यु निमोनिया से प्रतिवर्ष होती है. न्यूमो कोकस वैक्टीरिया निमोनिया का एक प्रमुख कारण है. पीसीवी वैक्सीन न्यूमोकोकस […]
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कार्यशाला. टीकाकरण में शामिल होगी वैक्सीन
मधुबनी : निमोनिया पांच वर्ष से कम उम्र बच्चों के मृत्यु का प्रमुख कारण है. वर्ष 2015 के अनुमान के अनुसार भारत में 1000 नवजात शिशुओं में 7 नवजात शिशु की मृत्यु निमोनिया से प्रतिवर्ष होती है. न्यूमो कोकस वैक्टीरिया निमोनिया का एक प्रमुख कारण है. पीसीवी वैक्सीन न्यूमोकोकस वैक्टीरिया से होने वाले िनमोनिया एवं अन्य बीमारियों से बचाव का सबसे कारगार तरीका है. इस वैक्सीन के इस्तेमाल से बच्चों में निमोनिया बीमारी से बच्चों को निजात मिलेगी. वहीं शिशु मृत्यु दर में भी कमी आयेगी.
ये बातें सिविल सर्जन डा. अमरनाथ झा ने सदर अस्पताल के सभा कक्ष में आयोजित पीसीवी प्रशिक्षण कार्यशाला में कहा. उन्होंने कहा कि पीसीवी वैक्सीन जल्द ही नियमित टीकाकरण में शामिल किया जायेगा. इस वैक्सीन के रख रखाव तथा उपयोग करने के तरीकों की विस्तृत जानकारी उपस्थित चिकित्सक, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक बाल विकास परियोजना पदाधिकारी व कोल्ड चैन हैडलर को दी गई.
कई चिकित्सक हुए शामिल . पीसीवी वैक्सिन के लांचिंग से पूर्व कार्यशाला में प्रशिक्षक में सीएस डा. अमरनाथ झा. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. एसपी सिंह, डब्लू एचओ के डा. संवित प्रधान, यूनिसेफ के प्रमोद कुमार झा व युएन डीपी के अनिल कुमार शामिल थे. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डा. सिंह ने बताया कि पीसीवी वैक्सिन काफी महंगा है. निजी क्लीनिकों में इसके एक डोज की कीमत 4 हजार रुपये आती है. अब तक यह वैक्सिन केवल निजी चिकित्सकों के पास ही उपलब्ध था.
लेकिन, भारत सरकार ने उसे मुफ्त में मुहैया कराने की रूप रेखा तैयार कर लिया है. डा. संवित प्रधान ने कहा कि पीसीवी वैक्सिन की खुराक 0 से 1 वर्ष के बच्चों को क्रमश: डेढ़ माह, साढ़े तीन माह व नौ माह पर दिया जायेगा. प्रमोद कुमार झा ने बताया कि 17 जुलाई से पीसीवी वैक्सिन लांच किया जायेगा. उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रशिक्षण प्राप्त सभी चिकित्सक अपने-अपने प्रखंड एएनएम, आशा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को प्रशिक्षित करेंगे. यूएन न्यूमोकोकस वैक्टिरिया से फैलता है. यह कम उम्र के बच्चों व वृद्ध व्यक्तियों को अपने संक्रमण में लेता है. चूंकि बच्चों व वृद्ध में प्रतिरोध क्षमता कम होती है.
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