पेंटिंग सहजने के लिए बने म्यूजियम में जीविका का प्रशिक्षण

Updated at :12 May 2017 5:28 AM
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पेंटिंग सहजने के लिए बने म्यूजियम में जीविका का प्रशिक्षण

मधुबनी : मिथिला पेंटिंग कला का सहेजने को जितवारपुर गांव में म्यूजियम का निर्माण दो साल पहले किया गया था वह परिकल्पना अब धूमिल होती जा रही है. कलाकार भी हैं, कला भी, पर इसे सहेजने की पहल नहीं हो रही है. आलम यह है कि जितवारपुर गांव में एक करोड़ की लागत से बने […]

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मधुबनी : मिथिला पेंटिंग कला का सहेजने को जितवारपुर गांव में म्यूजियम का निर्माण दो साल पहले किया गया था वह परिकल्पना अब धूमिल होती जा रही है. कलाकार भी हैं, कला भी, पर इसे सहेजने की पहल नहीं हो रही है. आलम यह है कि जितवारपुर गांव में एक करोड़ की लागत से बने म्यूजियम में अब पेंटिंग तो नहीं रहती पर इसमें अब जीविका कर्मियों का प्रशिक्षण शुरू कर दिया गया है. इससे इस क्षेत्र के कला प्रेमी व आम लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है.

दरअसल म्यूजियम का भवन तो बना दिया गया पर इसमें कोई संसाधन नहीं उपलब्ध करायी गयी. जिस कारण आज तक इसमें कला को सहेजने की पहल ही शुरू नहीं हो सकी. कलाकार प्रभात कुमार झा, राम रूप पासवान, कृष्णकांत झा, विजय कुमार झा, मोहन झा सहित अन्य कलाकारों का कहना था कि बिहार सरकार के प्रतिनिधि जब कभी भी गांव का दौरा किये तो कलाकारों के हित के लिए कई योजना का घोषणा भी किये . लेकिन, एक भी योजना चालू नहीं हुई.

बिहार सरकार द्वारा जितवारपुर में बाहर से आने वाला पर्यटक को ठहरने के लिए भवन बनाने की बात बतायी गयी थी. साथ ही कलाकारों के पेंटिंग को सुरक्षित रखने के लिए आर्ट गैलरी निर्माण की बात भी बतायी गयी थी.

सैलानियों के लिए नहीं बना गेस्ट हाउस. जिस समय म्यूजियम बना उस समय यह बात थी कि गांव में पेंटिंग की खरीद के लिये आने वाले विदेशी सैलानियों के ठहराव को एक गेस्ट हाउस भी बनायी जायेगी. ऐसा नहीं कि सैलानी नहीं आते. पर गांव में आने पर सैलानियों के आने पर गांव वालों के साथ साथ सैलानियों को भी
परेशानी होती है.
जितवारपुर गांव में रूप, फ्रांस, जापान एवं अमेरिका से मिथिला पेंटिंग को खरीदने व देखने के लिए पर्यटक आते है. इनको ठहरने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सेवा यात्रा के दौरान जितवारपुर में पर्यटक को ठहरने के लिए गेस्ट हाउस बनाने की बात वहां के कलाकारों को कहे थे. लेकिन, तीन साल बीत जाने के बाद भी यहां पर अभी तक भवन के लिए स्थल चयन भी नहीं हुआ है. कलाकार पूनम देवी, शिला देवी, गंगानाथ झा, विभूति नाथ झा का कहना था कि अगर गेस्ट हाउस बन जाता है तो स्थानीय कलाकारों को इससे अधिक सहूलियत होगी.
एक करोड़ से भवन बना, पर म्यूजियम में उचित संसाधन नहीं
तीन साल पहले सीएम ने गेस्ट हाउस बनाने के लिए दिया था स्थल चयन का आदेश
नहीं हो सका है अब तक स्थल का चयन, विदेशी सैलानियों को होती है परेशानी
कलाकारों में आक्रोश
म्यूजियम हाउस में चलता है प्रशिक्षण
म्यूजियम हाउस में जीविका का प्रशिक्षण चलता है. जीविका द्वारा गांव के नवोदित कलाकारों को प्रशिक्षण दिया जाता है. साथ ही कलाकारों के द्वारा बनाये गये पेंटिंग को प्रदर्शनी में भेजा जाता है. जीविका के मुद्रिका देवी का कहना था कि जीविका के माध्यम से यहां पर 5 से लेकर 25 साल के महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है. प्रशिक्षण के दौरान कलाकारों को मानदेय भी दिया जाता है. मुद्रिका देवी ने बतायी कि यहां पर जितने कलाकार काम करते है उनका निबंधन हस्तशिल्प कार्यालय से करवाया जाता है. ताकि कलाकारों द्वारा बनाये गये पेंटिंग का सही तरीका से बिक्री जाय और कलाकारों को समुचित लाभ मिल सके.
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