हम कटावपीड़ितों की, कोई तो सुने फरियाद
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :07 May 2017 6:57 AM
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व्यथा . बरसात में पूरी तरह से डूब जाता है कोचाधामन प्रखंड का निंगसिया, चिकनी गांव विशनपुर : कोचाधामन प्रखंड मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर पूरब में एनएच 327 ई मुख्य मार्ग के बगल विस्थापित मजकूरी पंचायत के निंगसिया गांव की कुल आबादी लगभग 5 सौ की है. इस गांव में लगभग 96 फीसद लोग […]
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व्यथा . बरसात में पूरी तरह से डूब जाता है कोचाधामन प्रखंड का निंगसिया, चिकनी गांव
विशनपुर : कोचाधामन प्रखंड मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर पूरब में एनएच 327 ई मुख्य मार्ग के बगल विस्थापित मजकूरी पंचायत के निंगसिया गांव की कुल आबादी लगभग 5 सौ की है. इस गांव में लगभग 96 फीसद लोग गरीब हैं. जिसके कारण मजदूरी करना एवं दूसरे प्रदेशों में जाकर काम करना इनका मुख्य रोजगार है.
उनका जीविका मजदूरी एवं थोड़ा-बहुत खेती से ही चलता है. इस गांव में दो व्यक्ति सरकारी नौकरी में है. यहां के बच्चों के शिक्षा के लिए एक विद्यालय एवं एक आंगनबाड़ी केंद्र खोला गया है. लेकिन बच्चों की शिक्षा संतोष जनक नहीं है. इस गांव में शिक्षा का प्रतिशत लगभग 15 प्रतिशत हैं. वही निंगसिया, चिकनी गांव के लोग बाढ़ पीड़ित है. इस गांव के लगभग 10 प्रतिशत बच्चे ही विद्यालय जाते है. निंगसिया और चिकनी गांव की मुख्य समस्या बाढ़ के पानी से बरसात के दिनों में पूरा गांव डूब जाता है और कनकई के कटाव से विस्थापितों जैसा जिंदगी जीने को विवश है.
नहीं सुनी जाती कटाव पीड़ितों की व्यथा : शनिवार को आयोजित इस गांव में बैठे लोगों द्वारा गांव की अनेकों प्रकार के समस्याओं के बारे में जानकारी हुई. लगभग 5 सौ की आबादी वाले इस गांव में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. गांव को बाढ़ के पानी से निजात एव सड़क सहित अन्य समस्याओं पर विशेष रूप से चर्चा किया गया. बरसात का मौसम शुरू होते ही इस गांव में बाढ़ का पानी घुस जाता है एवं पूरा गांव बाढ़ के पानी में डूब जाता है. विशेष रूप से बाढ़ के पानी से निजात पाने के लिए ग्रामीणों द्वारा चर्चा की गई.
क्या कहते हैं ग्रामीण : हरीहर प्रसाद यादव, नंद लाल यादव, राजेंद्र यादव, जागेश्वर यादव, बुद्धिनाथ ठाकुर, जनार्दन ठाकुर, परमेश्वर मंडल, अघोरी लाल, अरूण यादव, अनिल यादव सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि हम लोग विशेष रूप से बाढ़ व कटाव से बहुत परेशान हैं. प्रत्येक वर्ष बरसात के दिनों में गांव में बाढ़ का पानी घुस जाता है एवं पूरा गांव बाढ़ के पानी से घिर जाता है. जिसके बाद लोग उंचे स्थान स्कूल व सड़क किनारे शरण लेना पड़ता है.
क्या कहते हैं मुखिया : स्थानीय मुखिया ओम प्रकाश झा ने बताया कि कनकई नदी के कटाव से निंगसिया और चिकनी गांव काफी प्रभावित है. ककनई के कछार में बसे अधिाकंश परिवार के सदस्य दूसरे प्रदेश में काम कर अपना परिवार का भरण-पोषण करते है.
इस वर्ष भी उफनती कनकई को करना होगा नाव से पार
टेढ़ागाछ इस दफा भी टेढ़ागाछ प्रखंड के 12 पंचायत के 1.71 लाख आबादी को बरसात के मौसम में नाव का ही सहारा लेना पड़ेगा. जिला मुख्यालय किशनगंज अथवा महेशखूंट बहादुरगंज तक पहुंचने के लिए नाव की ही सवारी एक दफा फिर करनी होगी. यहां के लोग उफनती कनकई नदी को जान जोखिम में डाल नाव से ही पार करेंगे.मालूम हो कि लौचापुल निर्माण का वर्ष 2012 में आरंभ किया गया लेकिन वर्ष 2016 तक कार्य पूरा नहीं हो सकता है. कार्य में लगे संवेदक ने साफ कर दिया है कि प्राक्कलन के मुताबिक कार्य कर दिया गया लेकिन नदी की चौड़ा ज्यादे होने के कारण मेन धार पर निर्माण कार्य नहीं हो सका है. इसकी जानकारी विभागीय आलाधिकारियों को दे दी गयी है. फिलहाल पाया का कार्य बंद है. मालूम हो कि कनकई बढ़ने लगी है. बताते चलें कि टेढ़ागाछ का लाइफ लाइन माने जाने वाले कनकई नदी पर बन रहे लौचापुल आधा अधूरा बन कर तैयार है. वैसे अभी टेढ़ागाछवासी चचरी पुल के सहारे कनकनई नदी पार होने को विवश है. जैसे ही कनकई का जलस्तर बढ़ने लगेगा वैसे-वैसी चचरी पुल पर खतरा मंडराने लगता है. कितने दिनों तक चचरी चलेगा, अब यह कहना मुश्किल है. झमाझम बारिश होते ही चचरी पुल की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. स्थानीय लोगों की मानें तो मुश्किल से एक माह तक और सेवा दे पायेगी चचरी पुल. इसके बाद शुरू हो जायेगी नाव की सवारी.
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