टीबी मरीजों को प्रतिमाह 33 लाख की दवा दी जाती है मुफ्त
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :18 Feb 2017 5:59 AM
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मधुबनी : जिले के 2208 टीबी के मरीजों को प्रतिमाह 33 लाख 12 हजार रुपये की मुफ्त दवा दी जाती है. डाट्स दवा की खुराक मरीजों को छह माह से 10 माह तक दिया जाता है. जबकि एमडीआर मरीजों के दवा का खुराक 24 से 30 माह का होता है. जिसमें प्रति मरीज 2.5 लाख […]
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मधुबनी : जिले के 2208 टीबी के मरीजों को प्रतिमाह 33 लाख 12 हजार रुपये की मुफ्त दवा दी जाती है. डाट्स दवा की खुराक मरीजों को छह माह से 10 माह तक दिया जाता है. जबकि एमडीआर मरीजों के दवा का खुराक 24 से 30 माह का होता है. जिसमें प्रति मरीज 2.5 लाख से तीन लाख रुपये की मुफ्त दवा दी जाती है. टीवी का अंतिम स्टेज एक्सडीआर मरीजों का होता है. जिसके दवा की खुराक भी 24 से 30 माह का ही होता है और उसे 2.50 से तीन लाख रुपये की दी जाती है.
15 फरवरी से शुरू हुई पहल. टीबी के प्रथम स्तर के मरीजों को डाट्स के तहत प्रतिदिन दवा सेवन करने की मुहिम की शुरुआत 15 फरवरी से किया गया है. पूर्व में इन मरीजों को सप्ताह में तीन दिन ही दवा दिया जाता था. जिसे अब डेली रेजिमन के तहत प्रतिदिन दिया जा रहा है.
केंद्रीय यक्ष्मा प्रभाग की ओर से दी जाती है दवा. केंद्रीय यक्ष्मा प्रभाग नई दिल्ली द्वारा टीवी मरीजों के लिए मुफ्त दवा राज्य सरकार को उपलब्ध करायी जाती है. राज्य सरकार द्वारा जिला को दवा भेजी जाती है. जिला द्वारा पुन: विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को टीवी मरीजों के लिए दवा उपलब्ध करायी जाती है.
टीवी मरीजों में दर्ज हो रही है कमी
जिले में टीवी मरीजों की संस्था ने कुछ कमी दर्ज की जा रही है. जो टीवी पर नियंत्रण के लिए शुभ संकेत है.
नियमित दवा के सेवन से दूर होगी बीमारी. जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डा. एसपी सिंह बताते है कि टीवी मरीजों को डाट्स की दवा का सेवन नियमित करना चाहिए. यदि दवा को नियमित सेवन किया गया तो निश्चित ही 6 से 10 माह में इस रोग से छुटकारा पाया जा सकता है. वहीं रोगियों को नियमित जांच भी करनी चाहिए.
जिले में 2208 मरीज डाॅट्स के
71 मरीज एमडीआर व नौ एक्सडीआर के हुए चिह्नित
छह से 10 महीने में बीमारी से िमलेगा छुटकारा
एमडीआरडी के 71 मरीज
टीवी मरीजों का यह दूसरा स्तर है . मल्टी ड्रग्स रेसिसटेंट की श्रेणी में वैसे मरीज को रखा जाता है. जिसका डाट्स के दवा सेवन के बाद भी बीमारी खत्म नहीं होती है. ऐसे मरीजों को 24 से 30 माह तक उपचार में रखा जाता है. जिसमें लगभग तीन लाख रुपये की मुफ्त दवा दिया जाता है.
एक्सडीआर के 09 मरीज
टीवी मरीजों का अंतिम स्तर एक्स डीआर का होता है. वैसे मरीज जो एमडीआर के दवा खाने के बाद भी टीवी से मुफ्त नहीं होते है. एक्सडीआर की श्रेणी में आते है. जिले में एक्सडीआर के 9 मरीज चिन्हित है. इनका उपचार अवधि भी 24 से 30 माह का होता है. जिसके उपचार में 3 लाख से साढ़े तीन लाख की दवा मुफ्त दिया जाता है.
वर्ष टीबी मरीज
2013 – 2395
2014 – 2324
2015 – 2392
2016 – 2208
आंकड़ों पर गौड़ करे तो बीते चार वर्षों में टीवी मरीजों में मामूली कमी दर्ज की गयी है.
आधार कार्ड से जुड़ेंगे मरीज
अब प्रत्येक टीबी मरीज को आधार कार्ड व मोबाइल नंबर देना अनिवार्य होगा. ताकि देश में कही भी टीबी मरीजों को दवा उपलब्ध हो सके और टीबी मरीजों की सही जानकारी देश स्तर पर मिल सके. शुक्रवार को जिला यक्ष्मा केंद्र में जिला संचारी रोग पदाधिकारी डा. राघवेंद्र कर्ण व डब्लूएचओ कन्सलटेंट डाॅ कुरू की संयुक्त अध्यक्षता में जिले के सुपरवाइजर, टेक्नीशियन व एचआइवी काउंसलर की एक बैठक हुई. जिसमें (डेली रेजीमन) टीबी मरीजों को डेली डोज दवा देने की विस्तृत जानकारी दी गयी. बैठक में बताया गया कि प्रत्येक टीवी मरीज का आधार कार्ड व मोबाइल नंबर अवश्य लिया जाय. ताकि मरीज दवा सेवन के क्रम में यदि एक जगह से दूसरे जगह पर जाता है, तो उसे दवा उपलब्ध हो सके.
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