प्रतीक यादव की मौत फेफड़े में खून का थक्का जमने से हुई, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Edited by Rajneesh Anand
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अपर्णा यादव और प्रतीक यादव

Prateek Yadav : 13 मई की सुबह यह खबर सामने आई कि मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की मौत हो गई है. यह खबर चौंकाने वाली थी क्योंकि वे महज 38 साल के थे और उन्हें कोई स्वास्थ्य समस्या भी नहीं थी. संदिग्ध मौत की आशंका में उनका पोस्टमार्टम कराया गया. जिस वक्त उनकी मौत हुई उनकी पत्नी अपर्णा यादव लखनऊ से बाहर गई हुई थीं.

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Prateek Yadav : मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव की संदिग्ध मौत के बाद उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बताया गया है कि मौत का कारण बड़े पैमाने पर पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म के कारण कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स होना है. सामान्य भाषा में इसका अर्थ यह हुआ कि उनके फेफड़ों की नस में खून का बड़ा थक्का जम गया, जिसकी वजह से उनकी मौत हुई.

फेफड़े में जमा खून मौत की वजह

प्रतीक यादव का पोस्टमार्टम लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल काॅलेज में हुआ. रिपोर्ट में यह बताया गया है कि प्रतीक के फेफड़े में खून जम गया था. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उनके शरीर पर छह एंटीमॉर्टम यानी मौत से पहले के चोटों के निशान हैं. रिपोर्ट में उन चोटों को मौत की वजह नहीं बताया गया है.रिपोर्ट में कहा गया है कि उनके दिल खून के थक्के को आगे जांच के लिए फॉर्मेलिन में प्रिज़र्व किया गया है और विसरा को केमिकल एनालिसिस के लिए संबंधित लोगों को सौंप दिया गया है.38 साल के प्रतीक यादव का 13 मई की सुबह निधन हो गया था. उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल लाया गया था, लेकिन डाॅक्टरों का कहना था कि अस्पताल आने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी.

प्रतीक यादव कौन थे?

प्रतीक यादव मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे. उनकी पत्नी अपर्णा यादव उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष हैं. उत्तर प्रदेश के सबसे असरदार राजनीतिक परिवार का सदस्य होने के बावजूद वे खुद को राजनीति से अलग रखते थे. वे बिज़नेस और फिटनेस वेंचर्स पर ध्यान देते थे.यूनाइटेड किंगडम की लीड्स यूनिवर्सिटी से पढ़े-लिखे प्रतीक रियल एस्टेट और फिटनेस सेक्टर से जुड़े थे. लखनऊ में उनका आयरन कोर फिट नाम का एक जिम था . वे आवारा कुत्तों के लिए भी काम करते थे. अपर्णा यादव से उनकी लव मैरिज हुई थी. कुछ समय पहले दोनों के बीच तलाक की खबरें मीडिया की सुर्खियां बनी थीं, लेकिन बाद में खुद प्रतीक यादव ने ही यह स्पष्ट कर दिया था कि उन दोनों के बीच जो भी विवाद था वह सुलझ गया है.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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