Madhubani: अफसरों की मनमानी, डीएम-सीएस के आदेश को भी ठेंगा दिखा रहे स्वास्थ्य प्रभारी

Author :Aniket Kumar
Published by :Aniket Kumar
Updated at :13 May 2026 1:17 PM
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मधुबनी डीएम आनंद शर्मा

Madhubani News: जिले में डीएम और सिविल सर्जन के आदेश की अनदेखी हो रही है. स्वास्थ्य संस्थानों की अतिक्रमित भूमि की सूची एक माह बाद भी जमा नहीं की गई है, जिससे सरकारी जमीन को मुक्त कराने की प्रक्रिया बाधित हो रही है. पढे़ं पूरी खबर…

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मधुबनी से अनिल झा की रिपोर्ट

Madhubani News: जिले के स्वास्थ्य महकमे में अधिकारियों की मनमानी चरम पर है. आलम यह है कि जिलाधिकारी (डीएम) और सिविल सर्जन (सीएस) के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद स्वास्थ्य संस्थानों की अतिक्रमित भूमि का ब्यौरा देने में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. एक माह बीत जाने के बाद भी अब तक किसी भी संस्थान ने अपनी रिपोर्ट कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराई है.

7 अप्रैल को जारी हुआ था आदेश

डीएम आनंद शर्मा के निर्देश के आलोक में सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने बीते 7 अप्रैल को जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को पत्र लिखा था. इसमें निर्देश दिया गया था कि वे अपने और अपने अधीनस्थ संचालित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की अतिक्रमित भूमि की पूरी विवरणी प्रपत्र के माध्यम से उपलब्ध कराएं. लेकिन विडंबना यह है कि महीने भर बाद भी सीएस कार्यालय को एक भी सूची प्राप्त नहीं हुई है.

अतिक्रमण मुक्त कराने की योजना अधर में

प्रशासन की मंशा स्वास्थ्य संस्थानों की जमीन को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराने की है. इसके लिए प्रपत्र में अंचल, मौजा, कार्यालय परिसर का नाम, खाता-खेसरा संख्या, अतिक्रमित रकवा (लंबाई-चौड़ाई) और अतिक्रमणकर्ता का नाम समेत कई महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी गई थीं. रिपोर्ट मिलने के बाद ही जिला प्रशासन को कार्रवाई के लिए सूची भेजी जानी थी, लेकिन अधिकारियों की शिथिलता के कारण यह योजना अधर में लटकी हुई है.

जवाबदेही पर उठ रहे सवाल

वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश की इस तरह अनदेखी किए जाने से विभाग की कार्यसंस्कृति पर सवाल उठ रहे हैं. यह स्पष्ट है कि प्रखंड स्तर के पदाधिकारी न तो डीएम के आदेश को गंभीरता से ले रहे हैं और न ही सीएस के निर्देश को. इससे न केवल सरकारी कार्य बाधित हो रहे हैं, बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों की कीमती जमीन पर अवैध कब्जा भी बरकरार है. अब देखना यह है कि लापरवाही बरतने वाले इन अधिकारियों पर जिला प्रशासन क्या कार्रवाई करता है.

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Aniket Kumar

लेखक के बारे में

By Aniket Kumar

अनिकेत बीते 4 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थान के साथ काम करने का अनुभव. एंटरटेनमेंट, हाईपरलोकल और राजनीति की खबरों से अधिक जुड़ाव. वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत.

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