नहीं मिल रहा भाड़ा, परिवार चलाना भी मुश्किल

Updated at :14 Dec 2016 5:19 AM
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नहीं मिल रहा भाड़ा, परिवार चलाना भी मुश्किल

मधुबनी : नोटबंदी ने मजदूरों पर भी आफत ढा दी है. हर दिन 400 – से 500 रुपये कमाने वाले मजदूरों को मुश्किल से अभी 150 से 200 रुपये की कमाई हो पाती है. गिलेशन बाजार में ठेला चालक कोतवाली चौक निवासी सुरेश कुमार कहते हैं कि नोटबंदी से पहले हर दिन पांच सौ रुपये […]

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मधुबनी : नोटबंदी ने मजदूरों पर भी आफत ढा दी है. हर दिन 400 – से 500 रुपये कमाने वाले मजदूरों को मुश्किल से अभी 150 से 200 रुपये की कमाई हो पाती है. गिलेशन बाजार में ठेला चालक कोतवाली चौक निवासी सुरेश कुमार कहते हैं कि नोटबंदी से पहले हर दिन पांच सौ रुपये तक की कमाई हो जाती थी. पर जबसे नोटबंदी हुई है किसी दिन 100 रुपये तो किसी दिन 150 रुपये की कमाई हो पाती है. दिन भर में एक से दो भाड़ा ही मिल पाता है. इसका कारण है कि बाजार में ग्राहक ही नहीं है.

वहीं, महाराजगंज के मुमताज जो दुकानों में पलेदारी (सामान उठाने वाला मजदूर) करते हैं, कहते हैं कि मेरी कमाई भी बाधित हुई है. पर यह पहल ठीक है. कुछ दिन दिक्कत होगी. पर धीरे धीरे सब कुछ सामान्य हो जायेगा.
पिलखबार निवासी पुलपुल यादव कहते हैं कि बाजार में पहले ग्राहकों की भीड़ रहती थी. एक भाड़ा करके आते तो दूसरा मिल जाता. पर अभी तो हालत यह है कि जिसे एक दो भाड़ा मिल जाता है वह अपने आप को भाग्यशाली समझते हैं. कमाई पर निश्चय ही असर पड़ रहा है. अभी तो परिवार चलाना भी मुश्किल का काम है. पहले हर दिन कम से कम पांच सौ रुपये की कमाई होती थी. पर अभी यह आधे पर आ गयी है. किसी दिन 200 तो किसी दिन 250 रुपये की कमाई होती है.
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