चाय दुकानदारों का भी लाइसेंस
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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अब शहर में छोटे व बड़े व्यवसाय के शुरू करने लाइसेंस लेना होगा. लाइसेंस निर्धारण के बाद सालाना टैक्स का भी प्रावधान किया गया है. इससे नगर परिषद के राजस्व में बढ़ोतरी होगी. जिसे शहर में विकासात्मक कार्य किये जायेंगे. पर इस तरह के प्रावधान से छोटे व्यवसायियों की परेशानी बढ़ जायेगी. एक ओर लाइसेंस […]
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अब शहर में छोटे व बड़े व्यवसाय के शुरू करने लाइसेंस लेना होगा. लाइसेंस निर्धारण के बाद सालाना टैक्स का भी प्रावधान किया गया है. इससे नगर परिषद के राजस्व में बढ़ोतरी होगी. जिसे शहर में विकासात्मक कार्य किये जायेंगे. पर इस तरह के प्रावधान से छोटे व्यवसायियों की परेशानी बढ़ जायेगी. एक ओर लाइसेंस के लिए कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ेगा तो दूसरी ओर आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा.
मधुबनी : अब शहर में व्यवसाय शुरू करने के लिए नगर परिषद से निबंधन कराना होगा. साथ ही होल्डिंग टैक्स की तरह प्रतिवर्ष व्यवसाय कर देना होगा. नगर विकास एवं आवास विभाग से मिले दिशा निर्देश के आलोक में नगर परिषद ने कवायद तेज कर दी है.
कार्यालय सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि शहर में चाय दुकान से लेकर बड़े व्यवसायियों को तीन वर्गों में बांटा जायेगा. जिसके लिए सालाना पांच सौ पच्चास, एक हजार तथा 25 सौ पचास रूपये सालाना टैक्स देना होगा. तथा व्यवसाय निबंधन के लिए भी इतने ही रकम देने होंगे. अमूमन शहर में करीब पांच हजार व्यवसायिक प्रतिष्ठान है. जिसके नगर परिषद को करीब 50 लाख से अधिक आय होंगे, जिससे शहर में विकास के कार्य किये जायेंगे.
तीन वर्गों में बांटा जाएगा व्यवसाय
व्यवसायियों से व्यवसाय कर लेने के लिए तीन वर्गों में बांटा जायेगा. पहले वर्ग में छोटे-छोटे व्यवसाय को रखा गया है. जिसमें चाय पान जैसे दुकानों का रखा गया है. वहीं दूसरे वर्ग में मध्यम व्यवसाय को रखा गया है. जबकि तीसरे वर्ग में खाद्य सामग्री, निर्माण कार्य, आटा चक्की, आरा मशीन आदि को रखा गया है. जिसके लिए टैक्स के रूप में क्रमश: पहले वर्ग में आने वाले व्यवसाय के लिए 550 रूपये, दूसरे वर्ग के व्यवसाय के लिए एक हजार तथा तीसरे वर्ग के व्यवसाय के लिए 25 सौ पच्चास रूपये प्रतिवर्ष टैक्स देना होगा. गौरतलब हो कि कुल 352 प्रकार के ट्रेड के लिए लाइसेंस का निर्धारण किया गया है.
बढ़ेगी आमदनी
शहर में व्यवसायियों से सालाना टैक्स लिये जाने से नगर परिषद की आय में बढ़ोतरी होगी. अनुमान लगाया जा रहा है कि व्यवसाय कर से करीब 50 लाख से अधिक राजस्व की प्राप्ति होगी. गौरतलब है कि वर्तमान में नगर परिषद को विभिन्न प्रकार के टैक्स से आंतरिक स्त्रोत के रूप में करीब 1.25 करोड़ की प्राप्ति होती है.
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