वर्षो बाद कासीम ने रखा रोजा, कहा, हर दिन पीटती थी पाकिस्तानी पुलिस

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आज भी पाकिस्तानी जेल की प्रताड़ना को याद कर सिहर उठता कासीम बासोपट्टी : प्रखंड क्षेत्र के मानापट्टी गांव निवासी 55 वर्षीय कासीम लखपत राय लाहौर (पाकिस्तान) जेल से रिहा होकर अपने घर एक सप्ताह पूर्व पहुंचा है, लेकिन अभी तक वह जेल में बंदी जैसा महसूस कर रहे हैं. अब भी कासीम का स्वास्थ्य […]

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आज भी पाकिस्तानी जेल की प्रताड़ना को याद कर सिहर उठता कासीम
बासोपट्टी : प्रखंड क्षेत्र के मानापट्टी गांव निवासी 55 वर्षीय कासीम लखपत राय लाहौर (पाकिस्तान) जेल से रिहा होकर अपने घर एक सप्ताह पूर्व पहुंचा है, लेकिन अभी तक वह जेल में बंदी जैसा महसूस कर रहे हैं. अब भी कासीम का स्वास्थ्य खराब चल रहा है. उसका मानसिक हालत गड़बड़ बताया जा रहा है. उसे बेहतर इलाज के लिए रांची के अस्पताल में ले जाने की तैयारी में परिजन लेगे हैं.
इसके बावजूद आज भी कासीम के मन में अल्लाह की इबादत करने का जज्बा बरकरार है. कासीम कई वर्षो के बाद रोजा कर रहे है. कासीम के पिता मो ऐनुल ने बताया कि कासीम अपने घर पर रहने के बाद भी अभी तक पाकिस्तान जेल की यादों को भूल नहीं पाया है.
प्रताड़ित करती थी पाक पुलिस
कासीम ने बताया कि पाकिस्तान के जेल में प्रतिदिन पुलिस उसको पीट कर प्रताड़ित करती थी. उसके बाद काफी मेहनत वाली कार्य करने का टास्क दिया जाता था. कासीम से पाकिस्तान जेल में घास काटना, सफाई करना, पानी भरना आदि कार्य कराया जाता है. इसके बदले उसे दिन-रात मिलाकर मात्र दो बार खाना दिया जाता था. वह भी दिया गया खाना बिलकुल खराब रहता था. किसी तरह प्राण बचाने के लिए खाना पड़ता था. कासीम ने अपने मुंह के तरफ इशारा कर बताया कि पीट-पीट कर पूरा दांत तोड़ दिया है.
पाकिस्तान जेल में ही कासीम का एक और साथी पर भी पुलिस अत्याचार कर रही थी. उसका साथी अपना घर का पता एवं अपना नाम सब कुछ भुला चुका है.
वह अभी अमृतसर में किसी स्थान पर टिका हुआ है. कासीम के भाई ने बताया कि कासीम कभी-कभी जेल में बीते समय को परिजनों के साथ बांटता है. कासीम अपने पिता समेत भाई मजीबुल, मो अख्तर, मो अनाइत, बहन सदिया खातून, जुबैदा खातून समेत अन्य के साथ पुरानी याद को याद कर सभी के साथ लंबी बातें करते हैं.
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