कमरा नहीं, पेड़ के नीचे पढ़ रहे छात्र
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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मधवापुर : उत्क्रमित उच्च विद्यालय बिहारी के छात्र आज भी पेड़ के नीचे बैठ पढ़ाई कर रहे हैं. यह इनका शौक नहीं है. बल्कि विद्यालय में संसाधन के अभाव के कारण बच्चे इसके लिए मजबूर हैं. विद्यालय को तीन साल पहले मध्य विद्यालय से उच्च विद्यालय में उत्क्रमित तो कर दिया गया, लेकिन आज तक […]
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मधवापुर : उत्क्रमित उच्च विद्यालय बिहारी के छात्र आज भी पेड़ के नीचे बैठ पढ़ाई कर रहे हैं. यह इनका शौक नहीं है. बल्कि विद्यालय में संसाधन के अभाव के कारण बच्चे इसके लिए मजबूर हैं. विद्यालय को तीन साल पहले मध्य विद्यालय से उच्च विद्यालय में उत्क्रमित तो कर दिया गया, लेकिन आज तक इस विद्यालय को आवश्यकता के अनुरूप संसाधन मुहैया नहीं कराया जा सका.इस कारण छात्रों को पढ़ाई में बाधा समेत अन्य परेशानी से भी दो-चार होना पड़ता है.
800 छात्र हैं नामांकित
मिली जानकारी के अनुसार विद्यालय में छात्रों की संख्या आठ सौ से अधिक है. इनको पढ़ाने की जिम्मेदारी चौदह शिक्षकों पर है, लेकिन वर्ग कक्ष मात्र छह रहने के कारण कक्षा एक से छह तक के सैकड़ों बच्चे वर्षो से बरगद पेड़ तले खुले आसमान के नीचे पढ़ने को विवश हैं. जबकि सातवीं से दसवीं तक के बच्चों को ठूंसकर वर्ग कक्ष में कुछ नीचे तो कुछ ऊपर बैठते हैं.
संसाधन का अभाव
विद्यालय में संसाधन की काफी कमी है. तीन साल पूर्व इसे उत्क्रमित कर उच्च विद्यालय का दर्जा मिला, लेकिन विभाग या सरकार स्तर से अबतक भवन, शिक्षक, उपस्कर, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, फर्नीचर आदि अन्य आवश्यकताओं की दिशा में कोई समुचित पहल नहीं की गयी है.
इससे यहां अध्ययनरत सैकड़ों छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है. उत्क्रमण के पूर्व भी यह स्कूल छात्र बल की दृष्टि से विभिन्न मौलिक आवश्यकताओं से जूझ रहा था. उच्च विद्यालय के कक्षाओं के लिए अलग से शिक्षकों की बहाली नहीं होने की वजह से प्रारंभिक श्रेणी के शिक्षक ही किसी तरह बच्चों को वर्ग में उलझाकर रखते हैं. इससे उन बच्चों का भविष्य चौपट हो रहा है.
रसोइघर नहीं रहने से खुले आसमान के नीचे कड़ी धूप व बरसात में मध्याह्न् भोजन बनाया जाता है. चार चापाकल में तीन बंद हैं तो छात्र-छात्राओं के लिए अलग से एनजीओ द्वारा निर्मित कामचलाऊ दो शौचालय व दो मूत्रलय बनाया गया है. यहां मात्र 42 डिसमिल भूमि है, इसके कारण पुराने भवन को ध्वस्त किये बिना नए भवन व खेल मैदान का निर्माण संभव नहीं है.
क्या कहते हैं एचएम
प्रभारी एचएम अमरेंद्र मिश्र कहते हैं कि इस ओर कई बार विभाग और अधिकारियों को लिखा गया है, लेकिन अभी कुछ नतीजा नहीं निकल सका. इसके कारण समस्याएं ज्यों की त्यों बनी हुई है. जल्द ही फि र से उच्चधिकारियों को समस्या से अवगत करवाया जायेगा.
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